
Bankipur By Election: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने रविवार को यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान किया, जिसके कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जेडीयू प्रमुख नितीश कुमार से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया। हालांकि दोनों घटनाओं को आधिकारिक तौर पर एक-दूसरे से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन इनके समय को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
वहीं, आज बीजेपी नेताओं की भी बैठक पटना में हुई। राज्य भाजपा के कई नेता पार्टी दफ्तर पर मिले। इस मीटिंग में सीएम सम्राट चौधरी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मंत्री दिलुइप जयसवाल, गिरिराज सिंह सहित कई नेता मौजूद रहे।
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। ऐसे में प्रशांत किशोर का खुद चुनावी मैदान में उतरना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज इस सीट के जरिए शहरी मध्यम वर्ग, युवा मतदाताओं और पारंपरिक दलों से नाराज वोटरों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करेगी। पार्टी लंबे समय से खुद को बिहार में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है और बांकीपुर उपचुनाव उसकी पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ ही समय बाद सम्राट चौधरी का नीतीश कुमार के आवास पहुंचना भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि इस मुलाकात को आधिकारिक रूप से सामान्य प्रशासनिक या शिष्टाचार भेंट माना जा सकता है, लेकिन उपचुनाव की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रशांत किशोर के संभावित प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशांत किशोर वर्षों तक विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। अब पहली बार वह खुद चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में यह उपचुनाव उनके लिए रणनीतिकार से जननेता बनने की दिशा में सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
वहीं, एनडीए के सामने सिर्फ सीट बचाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि यह संदेश देने की भी कोशिश होगी कि उसका पारंपरिक शहरी और सामाजिक वोट बैंक अब भी उसके साथ मजबूती से खड़ा है।
यदि प्रशांत किशोर इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदलने में सफल रहते हैं, तो इसका असर सिर्फ बांकीपुर तक सीमित नहीं रहेगा। इसके परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि इसका आकलन चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।