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चुनाव आयोग पर प्रशांत किशोर का पलटवार, बोले- सिर्फ ज्ञानेश कुमार को हटाने भर से नहीं सुधरेगा सिस्टम

election reforms: सुराज नेता प्रशांत किशोर बोले, सिर्फ ज्ञानेश कुमार को हटाने से चुनाव आयोग की साख नहीं सुधरेगी। जानिए SIR, वोटर लिस्ट और बिहार MLC चुनाव पर क्या कहा।
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Oct 09, 2026
vote buying allegation
जन सुराज नेता प्रशांत किशोर ने वोटर लिस्ट, SIR, आचार संहिता पर उठाए सवाल, Photo Sourse@ANI

Bihar MLC Elections: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग और MLC चुनावों से जुड़े विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पिछले 8-10 सालों से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उन्होंने सही ठहराया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि सिर्फ चेहरा बदलने से ही चुनावी प्रक्रिया में सुधार संभव नहीं होगा।

प्रशांत किशोर ने कहा कि, चुनाव आयोग की साख बहाल करने के लिए व्यक्ति विशेष को हटाना काफी नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होनें वोटर लिस्ट से लेकर मतगणना और आचार संहिता के क्रियान्वयन तक हर स्तर पर सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। जन सुराज ने संकेत दिया है कि प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय होने तक उसका विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

वोट के बदले 10,000 रुपये, आयोग खामोश

बिहार के हालात का जिक्र करते हुए प्रशांत किशोर ने गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोटिंग से पहले हर वोटर को 10,000 रुपये देकर वोट खरीदे जाने का आरोप है, जबकि चुनाव आयोग मूकदर्शक बना हुआ है।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, जब तक चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय नहीं हो जाती, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे।

सुधार की जरूरत वाले छह बड़े मुद्दे

प्रशांत किशोर ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कई चिंताओं को गिनाया। उनका कहा कि, जब तक इन सभी स्तरों पर सुधार नहीं होता, केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे से व्यवस्था नहीं बदलेगी। उनके मुताबिक इनमें ये बातें शामिल हैं:

  • वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां
  • SIR के जरिए वोटरों के नाम हटाना
  • चुनाव का शेड्यूल
  • ऑब्जर्वर की नियुक्ति
  • वोटों की गिनती
  • आचार संहिता (Model Code of Conduct) को चुनिंदा तरीके से लागू करना

विधान परिषद चुनाव में पहली बार इन मुद्दों की बात

विधान परिषद चुनावों को लेकर प्रशांत किशोर ने बदलते रुझान की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि पहली बार इन चुनावों में शिक्षकों और ग्रेजुएट से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार वोटर अब जाति के बजाय शिक्षकों के लिए सातवें वेतनमान और ग्रेजुएट के लिए रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि चुनाव में अब सिर्फ 10 दिन बचे हैं, इसलिए सत्ताधारी पार्टी परेशान हो रही है। जन सुराज का कहना है कि NDA उम्मीदवारों को हराने से ये मांगें प्रमुखता से सामने आएंगी।

Updated on:
09 Oct 2026 02:58 pm
Published on:
09 Oct 2026 02:58 pm
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