
Prashant Kishor Bankipur Bengaluru Alliance Statement: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बांकीपुर को बेंगलुरु जैसा बनाने संबंधी अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। साथ ही कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी।
प्रशांत किशोर ने कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि सिर्फ प्रशांत किशोर या कोई व्यक्ति विधायक बन जाए तो बांकीपुर बेंगलुरु बन जाएगा। मैंने इतना कहा था कि जनता ने हमें मौका दिया है इसलिए अगले एक से डेढ़ साल के भीतर हम एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कर जारी करेंगे। इसमें बताया जाएगा कि बांकीपुर को बेंगलुरु या देश के अन्य विकसित शहरों की तर्ज पर कैसे विकसित किया जा सकता है।"
कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है और उसे अपनी राजनीतिक दिशा खुद तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल बिहार में कोई चुनाव नहीं है और राज्य में एनडीए सरकार काम कर रही है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता विकास होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "बिहार में फैक्ट्रियां लगनी चाहिए, बेरोजगारी कम होनी चाहिए और राज्य से पलायन रुकना चाहिए। फिलहाल किसी गठबंधन की जरूरत नहीं है।"
प्रशांत किशोर ने उपचुनाव में मतदान प्रतिशत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि इस बार बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदान किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि जनादेश का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी अब बांकीपुर के विकास की रूपरेखा तैयार करने पर काम करेगी और तय समय के भीतर उसका ब्लूप्रिंट सार्वजनिक करेगी।
जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह पूरी तरह उनका व्यक्तिगत आकलन है। उन्होंने कहा कि अगर-लेकिन के आधार पर राजनीति का विश्लेषण करने का कोई खास मतलब नहीं होता।
प्रशांत किशोर ने कहा, "यह उनका व्यक्तिगत आकलन और नजरिया है। अलग-अलग परिस्थितियों में क्या होता इस पर अटकलें लगाने का कोई मतलब नहीं है। अगर उसी स्थिति में नीतीश कुमार होते तो कौन यह गारंटी दे सकता है कि आज भी वह बीजेपी के साथ ही होते?"
प्रशांत किशोर ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं और नेताओं के फैसले भी उसी के अनुसार होते हैं। इसलिए काल्पनिक परिस्थितियों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मौजूदा राजनीतिक हालात और जनता के जनादेश पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।