प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में मिलने वाली अदृश्य सरस्वती नदी का असली उद्गम स्थल अब मिल गया है। भू-वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र सिंह के शोध के अनुसार, सरस्वती नदी मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के पंडाझीर गांव से निकलती है। यह भूमिगत जलधारा भीमकुंड और गुप्त गोदावरी होते हुए प्रयागराज तक पहुंचती है। जानिए इस वैज्ञानिक दावे और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र के बारे में विस्तार से।
प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के पास पवित्र गंगा में मिलने वाली अदृश्य सरस्वती नदी का वास्तविक उद्गम स्थल मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के सेवानिवृत्त रीजनल डायरेक्टर डॉ. सुभाष चंद्र सिंह ने लंबे समय तक किए गए शोध के बाद यह दावा किया है कि सरस्वती नदी का उद्गम छतरपुर जिले के सघन जंगलों के बीच बसे पंडाझीर गांव में है। यहां वर्षों से धरती से पानी निकलकर सतह पर बह रहा है और कुछ दूरी तक बहने के बाद जमीन में विलुप्त हो जाता है।
इसके बाद यही जलधारा आगे चलकर भीमकुंड, अर्जुन कुंड, सदवा गुफा और पातालगंगा में प्रवाहित होती है। आगे यह चित्रकूट स्थित गुप्त गोदावरी में भी वर्षों से बह रही है। अंतत: सरस्वती की यही भूमिगत जलधारा प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा नदी में मिल जाती है।
भोपाल निवासी डॉ. सिंह का यह शोधपत्र इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। इस विषय पर अन्य वैज्ञानिक भी शोध कार्य कर रहे हैं। डॉ. सिंह इसे विज्ञान कांग्रेस में भी प्रस्तुत कर चुके हैं।
पौराणिक नदी सरस्वती के बारे में माना जाता है कि हिमालय क्षेत्र में हुई बड़ी टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण लगभग चार हजार वर्ष पहले यह विलुप्त हो गई थी। इसके बाद वर्षा में कमी आई और गंगा व यमुना नदियों का प्रवाह भी कम हो गया। किंतु बाद में प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर गंगा और यमुना के अतिरिक्त भीतर से आते हुए पानी का बड़ा प्रवाह दिखाई दिया, जिसे सरस्वती नदी माना गया। इसी के बाद यह खोज शुरू हुई कि यह भूमिगत जल कहां से आ रहा है।