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पुणे में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: CBI ने धर दबोचे दो इंजीनियर; सामने आई चौंकाने वाली बात

Pune Engineer Corruption: सीबीआई ने पुणे के एमईएस खड़की में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर करते हुए असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। दोनों पर निजी कंपनी से भुगतान रिलीज करने के बदले 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगने और लेने का गंभीर आरोप है।

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Feb 06, 2026
CBI का एक्शन: एमईएस पुणे में रिश्वत लेते दो इंजीनियर गिरफ्तार (इमेज सोर्स: AI जनरेटेड)

Pune Engineer Scandal: पुणे के खड़की स्थित मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) में उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो इंजीनियरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार के इस भंडाफोड़ में पकड़े गए अधिकारी असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियर सुनील निकम और जूनियर इंजीनियर सुरेश म्हस्के पर एक निजी कंपनी से भुगतान रिलीज करने के नाम पर मोटी रकम वसूलने का आरोप है।

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शिकायतकर्ता का दावा

शिकायतकर्ता, जो उक्त कंपनी के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक हैं, ने बताया कि काम पूरा होने और सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद दोनों अधिकारी लगातार 6 लाख रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत दर्ज होने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की गति तेज की और बातचीत के दौरान तय हुई 2 लाख की पहली किस्त स्वीकारते ही दोनों को ट्रैप कर लिया। इस कार्रवाई ने एमईएस में फैले संभावित भ्रष्टाचार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

सीबीआई ने 5 फरवरी को जाल बिछाया और जैसे ही जूनियर इंजीनियर ने शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपए की पहली किस्त ली, उसे तुरंत रंगेहाथों पकड़ लिया। यह रिश्वत की रकम उसके ऑफिस से बरामद हुई। जांच में उसकी भूमिका सामने आने पर असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान सीबीआई को दोनों के घरों और दफ्तरों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, साथ ही 1,88,500 रुपए की संदिग्ध नकदी भी जब्त की गई। एजेंसी ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अब भी चल रही है।

सीबीआई की कार्रवाई तेज

इसके पहले, सीबीआई ने एक बड़े रिश्वत मामले में एक रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट और दो इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह मामला 3 फरवरी को गुवाहाटी के एडिशनल कमिश्नर, सीजीएसटी की शिकायत पर बनाया गया।

शिकायत के मुताबिक, ये तीनों अधिकारी मिजोरम के चम्फाई में कस्टम प्रिवेंटिव फोर्स (सीपीएफ) में काम करते हुए अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। 2022–2023 के दौरान उन्होंने सुपारी, सिगरेट और अन्य तस्करी के सामान बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जब्त किए और संबंधित लोगों से पैसे मांगते रहे। आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग मामलों में 35 लाख रुपए से ज्यादा रिश्वत लेकर जब्त किया हुआ सामान वापस कर दिया। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।

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