
Punjab Lecturer Recruitment Controversy: पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी सरकार पर बीजेपी लगातार निशाना साध रही है। वहीं अब पंजाब शिक्षा विभाग की ओर से 1,013 लेक्चरर पदों पर की जा रही भर्ती में आरक्षण प्रावधानों के कथित उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर बीजेपी के राज्य सभा सांसद तरुण चुघ ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना को पत्र लिखा है। इसके साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बीजेपी नेता चुघ ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के अभ्यर्थियों को उनके आरक्षण के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों और अभ्यर्थियों का अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदर्शन करना बेहद चिंताजनक है।
चुघ ने अपने पत्र में कहा कि पंजाब शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न विषयों में लेक्चरर पदों के लिए जारी भर्ती अधिसूचना को लेकर अभ्यर्थियों और संबंधित संगठनों में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं।
बीजेपी नेता चुघ ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग से भर्ती अधिसूचना, आरक्षण रोस्टर और इससे जुड़े अन्य आवश्यक रिकॉर्ड तलब करने का आग्रह किया है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरक्षण प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो पंजाब सरकार को आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की।
चुघ ने आरोप लगाया कि आप सरकार के कार्यकाल में इस भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित आरक्षण नियमों को उचित तरीके से लागू नहीं किया गया है।
चुघ के मुताबिक, भर्ती में पंजाबी, कॉमर्स, गणित, भौतिकी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भूगोल समेत कई विषयों के कुछ पदों को कथित तौर पर आरक्षण के दायरे से बाहर रखे जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में आरक्षण प्रावधानों और निर्धारित रोस्टर प्रणाली का पालन सुनिश्चित करना संवैधानिक समानता, सामाजिक न्याय और आरक्षित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
बीजेपी नेता तरुण चुघ ने अपने पत्र में यह भी जिक्र किया कि पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग इस मामले का स्वतः संज्ञान ले चुका है और शिक्षा विभाग से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मामले को गंभीरता से लेते हुए उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कराने और आरक्षण नियमों में किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर उचित कार्रवाई की सिफारिश करने का आग्रह किया है।