
Punjab Assembly Election 2027: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले राजनीतिक दलों द्वारा तैयारी भी तेज कर दी है। इससे पहले कांग्रेस के अंदर अदरूनी कलह और गुटबाजी सामने आ रही है। इसको खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी। पायलट ने आप सरकार के खिलाफ एक प्रदर्शन किया और प्रदेश के सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर ला दिया। इसी मंच से ऐलान हुआ कि प्रदेश में पार्टी एकजुट है और राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और सचिन पायलट के नाम पर वोट मांगे जाएंगे। चुनाव जीतने के बाद सीएम पद का फैसला आलाकमान करेगा।
हालांकि पार्टी की यह रणनीति कोई नई नहीं है। इससे पहले भी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव बिना सीएम लड़ी है और जीतने के बाद सीएम फेस का ऐलान किया था। हालांकि इन जगहों पर कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद भी सामने आए थे।
पिछले कुछ राज्यों के विधासनभा चुनावों में इस रणनीति के अलग-अलग परिणाम देखने को मिले हैं। खास तौर पर 2018 में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बिना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए चुनाव लड़ा और तीनों राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही। केरल में विधानसभा चुनाव 2026 में भी बिना सीएम फेस कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। यहां पर पार्टी ने जीत दर्ज की और बाद में विधायक दल का नेता चुना गया। हालांकि कई चुनावों में यही रणनीति कांग्रेस के लिए अपेक्षित परिणाम नहीं ला सकी।
बता दें कि 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सीएम फेस घोषित था। 2022 से पहले कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। 2022 के चुनाव में चन्नी के फेस पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि 2022 में कई राज्यों में सीएम फेस घोषित नहीं था। लेकिन उनमें कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था।
उस समय पार्टी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने की रणनीति अपनाई थी। लेकिन इन राज्यों में हार का सामना करना पड़ा।
बता दें कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर गुटबाजी और अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। इस बार पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच कलह है। पार्टी ने 2022 के चुनाव में भी गुटबाजी और कलह का खामियाजा भुगता था। उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कलह था।
इसी गुटबाजी और कलह के बीच कांग्रेस ने बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ने की बात कही है। पार्टी का मानना है कि यदि किसी एक नेता को सीएम फेस घोषित कर दिया, तो दूसरा गुट नाराज हो जाएगा। इससे पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि इस बार पंजाब में बिना सीएम फेस के कांग्रेस चुनावी मैदान में उतर रही है।