
आम आदमी पार्टी (आप) के लिए साल 2027 'मरो या मारो' वाला होगा। अगले साल पंजाब में विधान सभा चुनाव है। दिल्ली में सत्ता जाने के बाद पंजाब ही है, जहां पार्टी की सरकार है। इसके अलावा देश में कहीं पार्टी का आधार भी नहीं बचा है। ऐसे में अगर पंजाब में आप सत्ता में नहीं लौटी तो उसके लिए राजनीति में बने रहना भारी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में आ जाएगा। पंजाब के अलावा, गुजरात (4) और गोवा (2) में अभी पार्टी के छह विधायक हैं। उसके सांसदों की संख्या दोनों सदनों में 3-3 है। इसलिए पंजाब जीतना उसके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि गोवा और गुजरात से बहुत उम्मीद करना बेमानी होगा।
26 नवंबर, 2012 को वजूद में आई आप स्थापना के 15वें साल में ही अस्तित्व के संकट से गुजरने जा रही है।
| आम चुनाव (उपचुनाव नहीं) | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | चुनाव वर्ष | कुल सीटें | लड़ीं सीटें | जीतीं सीटें | वोट प्रतिशत (%) | चुनावी स्थिति / परिणाम |
| विधान सभा | दिल्ली | 2013 | 70 | 69 | 28 | 29.49% | कांग्रेस के समर्थन से पहली बार सरकार बनाई |
| लोक सभा | भारत (16वीं लोक सभा) | 2014 | 543 | 432 | 04 | 2.05% | पंजाब में 4 सीटें जीतीं (भगवंत मान, डॉ. धर्मवीर गांधी आदि) |
| विधान सभा | दिल्ली | 2015 | 70 | 69 | 67 | 54.30% | प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई |
| विधान सभा | पंजाब | 2017 | 117 | 112 | 20 | 23.70% | मुख्य विपक्षी दल बनी |
| विधान सभा | गोवा | 2017 | 40 | 39 | 00 | 6.27% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | गुजरात | 2017 | 182 | 29 | 00 | 0.10% | खाता नहीं खुला |
| लोक सभा | भारत (17वीं लोक सभा) | 2019 | 543 | 35 | 01 | 0.44% | केवल पंजाब की संगरूर सीट (भगवंत मान) जीती |
| विधान सभा | दिल्ली | 2020 | 70 | 70 | 62 | 53.57% | लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई |
| विधान सभा | पंजाब | 2022 | 117 | 117 | 92 | 42.01% | प्रचंड बहुमत से पंजाब में सरकार बनाई |
| विधान सभा | गोवा | 2022 | 40 | 39 | 02 | 6.77% | पहली बार 2 विधान सभा सीटें जीतीं |
| विधान सभा | गुजरात | 2022 | 182 | 181 | 05 | 12.92% | पहली बार 5 सीटें जीतीं (राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला) |
| विधान सभा | हिमाचल प्रदेश | 2022 | 68 | 67 | 00 | 1.10% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | कर्नाटक | 2023 | 224 | 209 | 00 | 0.58% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | मध्य प्रदेश | 2023 | 230 | 66 | 00 | 0.54% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | राजस्थान | 2023 | 200 | 85 | 00 | 0.38% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | छत्तीसगढ़ | 2023 | 90 | 57 | 00 | 0.93% | खाता नहीं खुला |
| लोक सभा | भारत (18वीं लोक सभा) | 2024 | 543 | 22 | 03 | 1.11% | पंजाब में 3 सीटें जीतीं (आनंदपुर साहिब, होशियारपुर, संगरूर) |
| विधान सभा | हरियाणा | 2024 | 90 | 89 | 00 | 1.79% | खाता नहीं खुला |
| विधान सभा | जम्मू और कश्मीर | 2024 | 90 | 7 | 01 | 0.52% | डोडा (Doda) सीट से 1 विधान सभा सीट जीती |
| विधान सभा | दिल्ली | 2025 | 70 | 70 | 22 | 43.57% | 22 सीटें जीतकर विपक्ष में बैठी |
पंजाब की लड़ाई आप के लिए चुनौतियों से भरी होगी। राज्य में आप को अकेले दम पर लड़ना होगा, क्योंकि कांग्रेस से उसका गठबंधन है नहीं, बाकी से होने के आसार नहीं हैं। राहुल गांधी, भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के बयानों से भी यह साफ है की दोनों पार्टियां दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं।
पंजाब में 2027 की लड़ाई अकेले दम पर लड़ना भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के लिए आसान नहीं होगा। विरोधी पार्टियों से जूझने के साथ आप को सत्ता विरोधी लहर और पार्टी के अंदर गुटबाजी-लड़ाई से भी जूझना होगा।
2025 का दिल्ली विधान सभा चुनाव याद करें तो न केवल आप सत्ता से बाहर हुई, बल्कि खुद अरविंद केजरीवाल भी विधान सभा से बाहर कर दिए गए। इस हार के बाद आप ने दो बड़े कदम उठाए। एक तो खुद को इंडिया समूह से बाहर किया (18 जुलाई, 2025 को सांसद संजय सिंह ने इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी) और दूसरा, हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ा। पार्टी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल की नई दिल्ली सीट से अनेक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से डिलीट कर दिए गए थे। उसके बाद से चुनाव आयोग के खिलाफ आप अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन करती रही है। 10 अक्तूबर को भी अरविंद केजरीवाल ने ऐसा किया था और पुलिस उन्हें पकड़ कर ले गई थी। शायद केजरीवाल ने आप की अलग पहचान बनाने के मकसद से यह रणनीति अपनाई हो, लेकिन पंजाब चुनाव के मद्देनजर यह शायद ही कारगर साबित हो।
पंजाब में अभी से कांग्रेस और आप के बीच जुबानी जंग खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। यह निजी टिप्पणी तक पहुंच गई है। आप को कांग्रेस के साथ बीजेपी और अकालियों से लड़ना है। एक मोर्चा उसकी पार्टी के अंदर भी खुला हुआ है, जो केजरीवाल और मान के लिए लड़ाई को और मुश्किल ही बनाएगा।
अरविंद केजरीवाल पर आरोप है कि दिल्ली में हार के बाद उन्होंने पंजाब को ही अपना ठिकाना बना लिया है और मान सरकार असल में वही और दिल्ली के उनके सहयोगी चला रहे हैं। स्थानीय नेताओं में इसे लेकर नाराजगी है और कई ने इसे जाहिर भी किया है। यह नाराजगी असंतोष का भी रूप ले चुकी है। इसका फायदा बीजेपी उठा रही है और वह उसके नेताओं को अपने पाले में कर रही है। हाल ही में उसने आप के तीन विधायकों (सनौर के हरमीत सिंह पठनमाजरा, समाना के चेतन सिंह ज़ोरमाजरा और अमृतसर नॉर्थ के कुंवर विजय प्रताप सिंह) को अपने पाले में किया है। आप में केंद्रीय स्तर के पंजाब के जो नेता थे, उनमें से ज़्यादातर लगभग आज बीजेपी में ही हैं। अरविंद केजरीवाल के साये के चलते स्थानीय नेता ताकतवर नहीं हो पा रहे और खुल कर नहीं 'खेल' पा रहे।
आप को सत्ता विरोधी लहर से भी लड़ना पड़ेगा, क्योंकि मान सरकार पर भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी के गंभीर आरोप हैं। 2022 के चुनाव के वक्त पार्टी ने वादा किया था कि उसकी सरकार बनी तो तुरंत महिलाओं को नकद पैसे दिए जाएंगे, लेकिन यह स्कीम इस साल जुलाई में लागू की गई। भ्रष्टाचार के आरोप में मान के कई मंत्रियों को इस्तीफा तक देना पड़ा है। विपक्ष चुनाव में मतदाताओं को यह याद दिलाने से चूकेगा नहीं।
2022 के चुनाव में सिख पंथ के अनेक वोटर्स शिरोमणि अकाली दल से नाराज होकर आप के खेमे में चले आए थे। वे इस बार भी ऐसा करेंगे, इसकी गारंटी नहीं है, क्योंकि मान से अकाल तख्त खुश नहीं है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब की जनता आप को जीवनदान दिलाती है या वेंटिलेटर पर भेजने का फैसला सुनाती है।