पुरी में यह उपलब्धि ‘सुजल - ड्रिंक फ्रॉम टैप’ (DFT) मिशन के तहत हासिल की गई है। यह मिशन 2020 में शुरू हुआ था और 2021 में पुरी को देश का पहला ऐसा शहर घोषित किया गया, जहां 24 घंटे पीने लायक पानी की आपूर्ति होती है।
भारत में ज्यादातर शहरों में नल का पानी सीधे पीने लायक नहीं होता है। पानी पीने के लिए लोग आरओ या फिल्टर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ओडिशा का तीर्थ शहर पुरी ऐसा इकलौता शहर है, जहां नल से निकलने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित और पीने योग्य है। यहां के निवासी और करोड़ों श्रद्धालु बिना किसी फिल्टर के सीधे टोंटी से पानी पी सकते हैं।
पुरी में यह उपलब्धि ‘सुजल - ड्रिंक फ्रॉम टैप’ (DFT) मिशन के तहत हासिल की गई है। यह मिशन 2020 में शुरू हुआ था और 2021 में पुरी को देश का पहला ऐसा शहर घोषित किया गया, जहां 24 घंटे पीने लायक पानी की आपूर्ति होती है। राज्य सरकार के अनुसार, शहर के 25,000 से ज्यादा घरों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। पानी की गुणवत्ता भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों पर खरी उतरती है।
पुरी में पानी की शुद्धता का राज एडवांस्ड ट्रीटमेंट प्रोसेस है। पानी को सेडिमेंटेशन, फिल्ट्रेशन, ओजोनेशन और क्लोरिनेशन जैसी बहु-स्तरीय प्रक्रिया से गुजारा जाता है। बैक्टीरिया और वायरस पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। रियल-टाइम सेंसर से क्वालिटी मॉनिटरिंग होती है और हाई-प्रेशर पाइपलाइनों से लगातार सप्लाई सुनिश्चित की जाती है।
इस पहल से पानी से होने वाली बीमारियां जैसे डायरिया और ई-कोलाई संक्रमण काफी कम हुए हैं। घरों में आरओ की जरूरत खत्म होने से प्लास्टिक कचरा और पानी की बर्बादी घटी है। सालाना 2 करोड़ श्रद्धालु आने वाले पुरी में अब बोतलबंद पानी पर निर्भरता कम हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नल का पानी मिनरल वाटर जैसा शुद्ध लगता है।
पुरी की सफलता से प्रेरित होकर ओडिशा सरकार अब भुवनेश्वर और कटक जैसे शहरों में DFT मिशन लागू कर रही है। राज्य में कई अन्य शहरी क्षेत्रों में भी यह सुविधा बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरी का मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण है, जहां ज्यादातर शहरों में नल का पानी दूषित होने की शिकायतें आम हैं।
हालांकि हाल के सर्वे में ओडिशा के अलावा कुछ अन्य शहरों में भी पानी की गुणवत्ता सुधरी है, लेकिन पूरे शहर में 24x7 डायरेक्ट ड्रिंकेबल टैप वाटर की सुविधा अभी सिर्फ पुरी में ही है। केंद्र सरकार की AMRUT 2.0 और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रही हैं।