पूर्व सेना प्रमुख की किताब को लेकर राहुल गांधी के बयान से संसद में सियासी तनाव बढ़ गया है। दिल्ली पुलिस की जांच, विपक्ष का विरोध और लोकसभा में हंगामे ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है।
पिछले कुछ दिनों से संसद का शीतकालीन सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता रहा है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण कार्यवाही बार बार बाधित हुई। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर बड़ा दावा कर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब में ऐसे तथ्य और संकेत हैं, जो सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असहज हो सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि किताब अभी औपचारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन लेखक खुद सोशल मीडिया पर इसके अंश साझा कर चुके हैं। राहुल के मुताबिक, इन बयानों से साफ है कि कुछ अहम सवालों के जवाब अब भी अधूरे हैं और सरकार को इन पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस मामले में दिल्ली पुलिस (DELHI POLICE) ने सोशल मीडिया पर किताब से जुड़ी जानकारियां प्रसारित होने के आरोप में प्राथमिक जांच दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही सामग्री की वैधता और अनुमति की जांच की जा रही है।
राहुल गांधी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लेखक खुद ट्वीट कर रहे हैं, तो फिर जांच का आधार क्या है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ते हुए सरकार पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। किताब के मुद्दे पर बोलने की अनुमति न मिलने से नाराज विपक्षी सदस्यों ने लोकसभा (LOK SABHA) में जोरदार नारेबाजी की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सांसदों ने सदन की कार्यवाही रोकने की मांग की, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया। सत्ता पक्ष का कहना था कि बिना आधिकारिक प्रकाशन किसी किताब के आधार पर चर्चा नहीं हो सकती। लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही एक ही दिन में दो बार स्थगित करनी पड़ी।