राहुल गांधी ने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े हंगामे पर स्पष्टीकरण दिया। कांग्रेस सांसद ने कहा है कि यह मैं नहीं, पूर्व आर्मी चीफ ने लिखा है, किताब छपने नहीं दी जा रही।
लोकसभा के बजट सत्र में डोकलाम और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब 'Four Stars of Destiny' पर उठे विवाद के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुप्पी तोड़ी और सफाई दी। सदन में हंगामा मचने के बाद संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में राहुल ने कहा, 'यह मैं नहीं हूं, यह पूर्व सेना प्रमुख ने किताब में लिखा है। किताब को प्रकाशित नहीं होने दिया जा रहा है। यह पूर्व आर्मी चीफ का दृष्टिकोण है। वे पूर्व सेना प्रमुख के दृष्टिकोण से इतने डरे क्यों हैं?'
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में भाजपा सांसद तेजसवी सूर्या के कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाने के जवाब में पूर्व सेना प्रमुख की किताब का हवाला दिया। उन्होंने एक मैगजीन (द कारवां) के आर्टिकल का प्रिंटआउट दिखाते हुए डोकलाम (2017) में "चीनी टैंक" के घुसने और लद्दाख गतिरोध (2020) पर किताब के अंश पढ़ने की कोशिश की। राहुल ने दावा किया कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका पर संवेदनशील जानकारी है, जो 56 इंच की छाती वाली छवि को चुनौती देती है।
जैसे ही राहुल ने अंश पढ़ना शुरू किया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। राजनाथ सिंह ने कहा कि अप्रकाशित किताब का हवाला सदन नियमों के विरुद्ध है और राहुल सदन को गुमराह कर रहे हैं। स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को अभिभाषण से जुड़े मुद्दों पर फोकस करने को कहा। हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
बाद में राहुल ने स्पष्ट किया कि वे खुद की राय नहीं रख रहे, बल्कि पूर्व सेना प्रमुख के लिखे को उद्धृत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, किताब लंगरिंग (अटकी हुई) है, प्रकाशन से रोकी जा रही है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत-चीन संबंधों का जिक्र है, तो इस पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? आर्टिकल में डोकलाम की पूरी समझ है। राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वे किताब छपने नहीं दे रहे क्योंकि उसमें सच्चाई सामने आएगी।
नरवणे ने पहले खुद कहा था कि किताब रक्षा मंत्रालय और प्रकाशक के बीच अटकी है। विपक्ष ने इसे सरकार की कमजोरी बताया, जबकि भाजपा ने राहुल पर नियम तोड़ने और समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने पलटवार में कहा कि सरकार पूर्व सेना प्रमुख की बात से डर रही है।