
लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को प्रणब मुखर्जी ने केंद्र सरकार में मंत्री बनने की सलाह दी थी। मुखर्जी को लगता था कि राहुल राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हुए हैं। सरकार में शामिल होने से उन्हें शासन चलाने का सीधा अनुभव होगा। मुखर्जी डायरी लिखते थे और उसके कुछ पन्नों पर राहुल गांधी के बारे में भी कई बातें दर्ज हैं। प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी किताब 'इन प्रणब, माई फादर: ए डॉटर रिमेंबर्स' के जरिए इनमें से कुछ बातों को सार्वजनिक किया है।
प्रणब मुखर्जी ने राहुल को 'बड़ा विनम्र' और 'जिज्ञासु' बताया था। साथ ही, उन्होंने उन्हें राजनीतिक रूप से अपरिपक्व भी पाया था। ये टिप्पणियां 2009-10 के दौर की थीं।
बता दें कि राहुल गांधी 2004 में अमेठी से पहली बार लोक सभा चुनाव लड़े और जीते थे। वह राजनीति में मर्जी से नहीं आए थे। शुरुआत में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह राजनीति में आने के इच्छुक नहीं हैं। 2004 में सोनिया गांधी की जगह अमेठी से चुनाव लड़वाए जाने के वक्त भी उन्होंने यही कहा था कि वह अपनी मां और अपने परिवार के गढ़ के लोगों की इच्छा का सम्मान कर रहे हैं।
| वर्ष | कब क्या बने, क्या हुआ, क्या किया | ब्योरा |
| मार्च 2004 | सक्रिय राजनीति में प्रवेश | कांग्रेस की पारंपरिक सीट उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। |
| मई 2004 | पहली बार सांसद निर्वाचित (14वीं लोकसभा) | पहले ही चुनाव में भारी अंतर (3 लाख वोट) से जीतकर संसद पहुंचे। |
| 2007 | अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव | पार्टी के युवा विंग भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और एनएसयूआई (NSUI) के प्रभारी बनाए गए। संगठन में आंतरिक चुनावों की शुरुआत की। |
| 2009 | दूसरा लोकसभा कार्यकाल | अमेठी से फिर संसद पहुंचे। |
| जनवरी 2013 | कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष | जयपुर अधिवेशन में मिली जिम्मेदारी। |
| 2014 | तीसरा लोकसभा कार्यकाल (16वीं लोकसभा) | मोदी लहर के बीच अमेठी से चुनाव जीते, हालांकि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम सीटों पर सिमट गई। |
| दिसंबर 2017 | कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष | सोनिया गांधी से पदभार ग्रहण करते हुए पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। |
| 2019 | चौथा लोकसभा कार्यकाल और अध्यक्ष पद से इस्तीफा | 2019 के आम चुनाव में केरल की वायनाड सीट से जीते, लेकिन अमेठी सीट से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। |
| मार्च 2023 | संसद सदस्यता से अयोग्यता (Disqualification) | मानहानि के एक मामले में सूरत कोर्ट के फैसले के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। (बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाने के बाद सदस्यता बहाल हुई)। |
| सितंबर 2022 - जनवरी 2023 | भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) | कन्याकुमारी से कश्मीर तक लगभग 3,500 किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्रा का नेतृत्व किया। |
| जनवरी - मार्च 2024 | भारत जोड़ो न्याय यात्रा (Bharat Jodo Nyay Yatra) | मणिपुर से मुंबई तक लगभग 6,700 किमी लंबी दूसरी जन-यात्रा निकाली। |
| जून 2024 | पांचवां लोकसभा कार्यकाल एवं नेता प्रतिपक्ष | 2024 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रायबरेली और केरल की वायनाड दोनों सीटों से जीत दर्ज की। बाद में वायनाड सीट छोड़कर रायबरेली अपने पास रखी। 25 जून 2024 को आधिकारिक तौर पर संसद में नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) नियुक्त किए गए। |
राहुल गांधी कभी-कभार प्रणब मुखर्जी से मिलने राष्ट्रपति भवन जाया करते थे। ऐसी ही एक मुलाक़ात में मुखर्जी ने उन्हें कैबिनेट में शामिल होने की सलाह दी थी। 25 मार्च, 2013 के एक नोट में प्रणब मुखर्जी ने राहुल के बारे में लिखा था, 'उनकी रुचि कई विषयों में है, लेकिन बहुत जल्द यह रुचि एक से हट कर दूसरे विषय पर टिक जाती है। मुझे नहीं पता कि वह कितना सुनेंगे और कितना अमल करेंगे।'
प्रणब मुखर्जी भारत के राष्ट्रपति बन गए, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं बन सके। राष्ट्रपति बनने की इच्छा उन्होंने शायद ही कभी रखी हो, लेकिन प्रधानमंत्री बनने की रखी थी। शर्मिष्ठा ने किताब में यह बात स्पष्ट की है। उन्होंने लिखा है कि पीएम बनने की इच्छा के बारे में पूछने पर उनके पिता ने उनसे साफ कहा था, 'क्यों नहीं? मैं प्रधानमंत्री बनना चाहता हूं। मेरी हैसियत का कोई भी नेता यह इच्छा रखेगा। लेकिन, सिर्फ इसलिए कि मेरी इच्छा है, जरूरी नहीं है कि मुझे यह पद हासिल हो जाएगा।'
11 दिसंबर, 1935 को जन्मे प्रणब मुखर्जी 1960 के दशक से ही राजनीति में थे। 31 अगस्त, 2020 को दुनिया को विदा कहने वाले मुखर्जी राष्ट्रपति भवन पहुंचने से पहले पांच बार राज्य सभा और दो बार लोक सभा के सांसद रह चुके थे। इस दौरान कांग्रेस में अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ सालों कई मंत्रालयों में मंत्री रहे थे।
| कब | क्यापद / राजनीतिक भूमिकारही | ब्योरा |
| 1967 – 1972 | बंगला कांग्रेस (Bangla Congress) के संस्थापक सदस्य | शुरुआत में क्षेत्रीय दल से जुड़े और 1967 के संयुक्त मोर्चा गठबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई। |
| जुलाई 1969 | राज्यसभा सांसद (पहला कार्यकाल) | मिदनापुर उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार की सफल चुनावी कमान संभालने के बाद इंदिरा गांधी के संपर्क में आए और कांग्रेस समर्थित/बंगला कांग्रेस के कोटे से पहली बार संसद (राज्यसभा) पहुंचे। |
| 1972 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में विलय | बंगला कांग्रेस का इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस में औपचारिक विलय हुआ, जिसके बाद वे मुख्यधारा की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बने। |
| 1982 – 1984 | केंद्रीय वित्त मंत्री (First Term) | इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में देश के वित्त मंत्री बने। (उनके कार्यकाल में ही डॉ. मनमोहन सिंह आरबीआई गवर्नर नियुक्त किए गए थे)। |
| 1980 – 1985 | राज्यसभा में सदन के नेता (Leader of the House) | इंदिरा गांधी सरकार के दौरान उच्च सदन में सदन के नेता की जिम्मेदारी संभाली। |
| 1991 – 1996 | योजना आयोग के उपाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री | राजीव गांधी की मृत्यु के बाद पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष और बाद में विदेश मंत्री (1995–96) रहे। |
| 2004 | लोकसभा में प्रवेश (पहली बार) | पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल की जंगीपुर सीट से संसद के निचले सदन पहुंचे। |
| 2004 – 2006 | केंद्रीय रक्षा मंत्री (Defence Minister) | मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA-1 सरकार में देश के रक्षा मंत्री रहे। |
| 2006 – 2009 | केंद्रीय विदेश मंत्री (External Affairs Minister) | यूपीए सरकार में विदेश मंत्रालय का प्रभार संभाला। |
| 2009 – 2012 | केंद्रीय वित्त मंत्री (Second Term) & लोकसभा में सदन के नेता | देश की अर्थव्यवस्था की कमान संभालते हुए वित्त मंत्री रहे। साथ ही, लोकसभा में सरकार (सदन) का नेतृत्व किया। |
| 2012 – 2017 | भारत के 13वें राष्ट्रपति | 25 जुलाई 2012 को देश के सर्वोच्च पद की शपथ ली। |
| 2019 | भारत रत्न (Bharat Ratna) | देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए गए। |
प्रणब मुखर्जी के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा या संभावना दो बार बनी। एक बार 1984 में। इंदिरा गांधी की हत्या (31 अक्तूबर) के बाद। फिर 2004 में। सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री बनने की रेस से बाहर हो जाने के बाद। लेकिन, इच्छा होने के बावजूद प्रणब दादा जानते थे कि सोनिया गांधी उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाने जा रही हैं।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 'इन प्रणब, माई फादर: ए डॉटर रिमेंबर्स' में लिखा है, 'प्रधानमंत्री की दौड़ से सोनिया गांधी के बाहर हो जाने के बाद मीडिया और राजनीतिक हलकों में जबरदस्त कयास लगने लगे थे। पीएम पद के लिए मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा थी। मुझे कई दिनों तक बाबा से मिलने का मौका नहीं मिला, क्योंकि वह बुरी तरह व्यस्त रहा करते थे। लेकिन, फोन पर बात होती रहती थी। मैंने उत्सुकतावश उनसे पूछ लिया कि क्या वह प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं? उन्होंने साफ जवाब दिया- नहीं, वह (सोनिया) मुझे पीएम नहीं बनाएंगी। मनमोहन सिंह बनेंगे। पर उन्हें जल्दी से इसकी घोषणा भी कर देनी चाहिए, क्योंकि असमंजस की स्थिति देश के लिए ठीक नहीं होगी।'
2004 के लोक सभा चुनाव में जीत के बाद सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा थी, लेकिन 17 मई 2004 को प्रणब मुखर्जी ने अपनी डायरी में लिखा था, 'सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनने की रेस से बाहर हो गईं। भाजपा (जिसने सोनिया के विदेशी मूल को मुद्दा बनाया था) का घटिया अभियान। अर्जुन (सिंह), अहमद पटेल और गुलाम नबी को बुलाया गया था। हम सब हैरान रह गए थे।'
18 मई को उन्होंने लिखा था, 'सोनिया गांधी फैसले पर अडिग हैं। देश भर में विरोध हो रहा है। सहयोगी दल भी हैरान हैं। सीपीपी (कांग्रेस संसदीय दल) की बैठक भी संवेदनाओं से भरी रही। उनसे दोबारा विचार करने की अपील की गई। रात एक बजे तक काम किया।'
19 मई को प्रणब मुखर्जी ने अपनी डायरी में लिखा, 'हल निकल गया। मनमोहन सिंह पीएम होंगे। मनमोहन और सोनिया जी राष्ट्रपति से मिले, जिन्होंने सहर्ष मनमोहन सिंह को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।'