
Rahul Gandhi: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं के मार्च के दौरान हुई धक्का-मुक्की की कथित घटना को लेकर नोटिस जारी किया है। इस मार्च के दौरान तीन महीने की गर्भवती एक महिला पत्रकार गिर गई थीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़ी याचिका में खुद को पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की बेंच के सामने वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया द्वारा इस मामले का जिक्र किए जाने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को औपचारिक नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में महिला पत्रकार ने आरोप लगाया है कि प्रतिवादी संख्या 4 यानी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मार्च के दौरान उन्हें अचानक इतनी जोर से गेट की तरफ धक्का दिया कि उनका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। अर्जी में कहा गया है कि यह भीड़भाड़ में होने वाली सामान्य धक्का-मुक्की नहीं थी, बल्कि यह जानबूझकर दिया गया धक्का था। गिरने के कारण उनका मोबाइल फोन टूट गया और कॉलर पर लगा माइक्रोफोन रिसीवर भी निकल गया। इस पूरी घटना का वीडियो उनके कैमरामैन ने रिकॉर्ड कर लिया है।
याचिका में बताया गया है कि गिरने से पहले पत्रकार ने अपने आस-पास मौजूद लोगों से बार-बार धक्का न देने की विनती की थी। लेकिन राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए जा रहे नारों में उनकी आवाज दब गई। महिला पत्रकार का आरोप है कि उनके जमीन पर गिर जाने के बाद भी न तो राहुल गांधी और न ही उनके साथ मौजूद नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं या सुरक्षाकर्मियों में से किसी ने रुककर उनका हाल पूछा या यह जानने की कोशिश की कि उन्हें कोई चोट तो नहीं आई है। पीड़िता का कहना है कि उनके हाथों से खून बह रहा था और वह लगभग 40 मिनट तक फुटपाथ पर बैठकर आने-जाने वालों से मदद मांगती रहीं।
याचिका में कहा गया है कि घटना के कुछ समय बाद ही पीड़िता को पेट में दर्द होने लगा। इसके चलते उसे सर गंगा राम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। जहां शुरुआती जांच और दवा देने के बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी तो दे दी, लेकिन साथ ही कुछ और स्कैन और टेस्ट कराने की सलाह भी दी। साथ ही डॉक्टरों ने उन्हें हिदायत दी कि अगर दर्द, ब्लीडिंग या किसी तरह का डिस्चार्ज महसूस हो, तो तुरंत अस्पताल वापस आ जाए।
याचिका में बताया गया है कि जिस तरह से उसे देश के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार पर इस तरह से गिराए जाने, अपने अजन्मे बच्चे की जान के डर और सरेआम हुए अपमान से उन्हें गहरा शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है।
महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि घटना के बाद कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने सारा दोष उन पर मढ़ने की कोशिश की। उन्होंने अदालत में बताया कि वह उस जगह पर किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने नहीं, बल्कि एक पत्रकार के तौर पर अपना पेशेवर कर्तव्य निभाने गई थीं। इसे 'सेकेंडरी विक्टिमाइजेशन' बताते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि विपक्षी नेताओं के बयानों की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि नई दिल्ली में पुलिस उपायुक्त (DCP) के पास एक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74, 115(2), 125, 131 और 3(5) के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। हालांकि पुलिस ने अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है।
17 अक्टूबर को दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दे और इस मामले में दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब करे। इसके अलावा, याचिका में 12 अक्टूबर के सभी CCTV फुटेज, एंट्री पास, विजिटर रजिस्टर और मीडिया फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी से मुआवजा, राहुल गांधी और कांग्रेस से बिना शर्त सार्वजनिक माफी, पत्रकार और उनके परिवार की सुरक्षा एवं कोर्ट परिसर के भीतर हुई हिंसा के संबंध में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बेंच ने नोटिस जारी कर दिए हैं।