कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ मोदी सरकार विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इसके बाद एक बार फिर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खिलाफ सदन में आया प्रस्ताव एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है.
Rahul Gandhi privilege motion: संसद का बजट सत्र हंगामेदार चल रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सदन में सरकार को जमकर घेरा। इस दौरान उन्होंने एपस्टीन फाइल्स से लेकर यूएस डील का भी जिक्र किया। हालांकि अब सरकार ने भी कांग्रेस सांसद के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। राहुल गांधी के खिलाफ सरकार विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने जा रही है।
1978 में लोकसभा में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद इंदिरा गांधी की सदस्यता भी चली गई और कुछ दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था।
सदन में इंदिरा गांधी के खिलाफ आए इस प्रस्ताव के पक्ष में 279 वोट और विपक्ष में 138 वोट डाले गए। 37 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। सदन ने इंदिरा गांधी के पूर्व सहयोगी आर.के. धवन और सीबीआई के पूर्व प्रमुख डी. सेन को भी जेल भेजने का प्रस्ताव पारित किया। यह पहली बार है कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री को विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना के आरोप में विश्व में कहीं भी जेल भेजा गया है। यह भी पहली बार है कि किसी सांसद को सदन द्वारा जेल की सजा सुनाई गई है।
दरअसल, ऐसा ही मामला राज्यसभा में हुआ था, जब 1976 में सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया था और उनकी सदस्यता भी चली गई थी।
विशेषाधिकार का हनन तब माना जाता है जब संसद में उसके सदस्यों या अधिकार, सम्मान और स्वतंत्र कार्यप्रणाली में कोई व्यक्ति या संस्था बाधा डालती है। इसके अलावा, सदन में किसी अन्य सांसद पर कोई आरोप लगाया तो उसे साबित करना होगा। इसके लिए सबूत देना होता है और बताना होता है कि ये बातें कहां से कोट की हैं और संबंधित कागजातों की कॉपी सदन में देनी होती है।
दरअसल, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में मोदी सरकार को एपस्टीन फाइल्स से संबंधित कुछ जानकारी सदन में अपने भाषण के दौरान दी थी। अब सत्ता पक्ष का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष ने जो जानकारी दी है, उसे सत्यापित करें, वरना उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।
जब विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है, तो आमतौर पर इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष चाहें तो कुछ सांसदों की एक अस्थायी समिति बनाकर यह मामला उसे सौंप देते हैं। यह समिति पूरे मामले की जांच करती है और जवाब मांगती है फिर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है।
लोकसभा में यह समिति आम तौर पर 15 सांसदों की होती है, जबकि राज्यसभा में 10 सांसदों की। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। इसके बाद रिपोर्ट को सदन में रखा जाएगा और फिर सदन तय करेगा कि क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
अगर सदन को बहुमत से लगे कि सदस्य ने गंभीर गलती की है, तो उसके खिलाफ निष्कासन (सदस्यता खत्म करने) तक की कार्रवाई भी हो सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। दरअसल, सदन में कांग्रेस सांसद ने जनरल नरवणे की किताब को लेकर काफी हंगामा किया था, जिससे सरकार खुश नहीं है। इसी किताब का जिक्र कर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में सरकार भी राहुल गांधी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की रणनीति बना रही है।अब देखते है कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पारित होता है तो उन पर क्या कार्यवाही होगी?