
Rahul Gandhi Tata Group: नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा ग्रुप को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और देश का कोई भी कारोबारी इस मुद्दे पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। वहीं राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा ने पलटवार किया है।
राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है। आप कब तक चुप रहेंगे? तब तक, जब तक वे आप पर कब्जा नहीं कर लेते? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय कारोबार उनके निजी खिलौने नहीं हैं। राहुल ने कहा कि आपमें हिम्मत नहीं है, लेकिन हममें है। हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा नेता राधिका खेड़ा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा सिंघवी जी, कृपया अपने खुद के अकाउंट से ट्वीट करें! नेता प्रतिपक्ष अब अपने वकील के असिस्टेंट बन गए हैं। राहुल बाबा के ट्विटर अकाउंट का इस्तेमाल अब हर उस क्लाइंट के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जाएगा, जिसका प्रतिनिधित्व सिंघवी जी करेंगे। गांधी परिवार का चिराग अब एक मजाक बनकर रह गया है… क्या दिन आ गए हैं पप्पू के!
1.विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
-टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और कंपनी की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर विवाद सामने आया।
-टाटा संस के बोर्ड और बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद गहरा गए हैं।
-विवाद का केंद्र कॉरपोरेट गवर्नेंस, नियामकीय नियमों और समूह के परोपकारी उद्देश्यों को बनाए रखने का सवाल है।
2.टाटा संस में किसकी कितनी हिस्सेदारी है?
-टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
-शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
-टाटा संस समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और एन. चंद्रशेखरन वर्ष 2017 से इसके चेयरमैन हैं।
3.नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच विवाद क्यों?
-रतन टाटा के अक्टूबर 2024 में निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने।
-17 सितंबर 2026 को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया।
-नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और इसे अवैध तथा कानूनी रूप से अमान्य बताया।
-उनका तर्क है कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सहमति जरूरी है।
-दूसरी ओर, बोर्ड के बहुमत और एसपी समूह सहित अन्य निदेशकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
5.टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहा है?
-ट्रस्ट्स का मानना है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से समूह का परोपकारी चरित्र प्रभावित हो सकता है।
-दीर्घकालिक निवेश और धैर्यपूर्ण पूंजी उपलब्ध कराने की क्षमता कमजोर पड़ने की आशंका है।
-ट्रस्ट्स को मिलने वाले लाभांश पर भी असर पड़ने की चिंता जताई गई है।
-लिस्टिंग से बचने के लिए वैकल्पिक प्रस्तावों पर विचार किया गया है।
-सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के पास शिकायतें दर्ज कराईं।
-शिकायतों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं, टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में कथित हस्तक्षेप और नोएल टाटा की भूमिका से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
-नोएल टाटा, नेविल टाटा और कुछ अन्य ट्रस्टियों ने जवाबी पत्रों में आरोपों का खंडन किया।
-चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट से जवाब मांगा है।
-कानूनी कदमों और कैविएट दाखिल किए जाने से कुछ बैठकों की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।