
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी कार्ड को आधार बनाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के इस बयान के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके पीछे चुनाव में धांधली करने और नागरिकों के मतदान का अधिकार छीनने की गहरी साजिश है। उन्होंने इसे 'राइट्स थेफ्ट' यानी अधिकारों की चोरी करार दिया।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर कहा कि सरकार की यह नई व्यवस्था नागरिकों के बुनियादी अधिकारों के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मतदाता सूची से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, जबकि उनके मुताबिक मतदाता सूचियों में पहले से ही हेरफेर किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह यह कहते नजर आ रहे हैं कि आधार कार्ड अब आसानी से हर गली-मोहल्ले में बन जाते हैं, इसलिए अब आधार को योजनाओं का आधार नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब लाभार्थियों के भुगतान का आधार बायोमेट्रिक और वोटर आईडी कार्ड होगा।
केंद्रीय मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार के मंत्री का यह ऐलान कि योजनाओं के फायदे अब आधार से नहीं, बल्कि वोटर आईडी से तय होंगे, एक बेहद गहरी साजिश है। इसे समझने में थोड़ा वक्त लें। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में उन लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं जो भाजपा की नीतियों से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि जिसका नाम कटा, उसका वोट गया। जिसका वोट गया, उसके अधिकार गए। गरीब की पेंशन को उसके वोटर कार्ड का गुलाम नहीं बनाया जा सकता।
राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि निष्पक्ष मतदाता सूची को सत्ताधारी दल के अनुकूल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी मतदाता सूची बनाने की तैयारी चल रही है जिससे स्थायी चुनावी लाभ उठाया जा सके। राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ चुनाव जीतने की राजनीति नहीं, बल्कि चुनाव चुराने और स्थायी रूप से सत्ता में बने रहने की व्यवस्था है, जिसे कांग्रेस कतई होने नहीं देगी।