Dog funeral with full rituals: राजस्थान में एक कुत्ता पूरे गांव को सेवा-भाव, संवेदनशीलता और इंसानियत का पाठ पढ़ा गया है। कुत्ते की मौत से ग्रामीण दुखी हैं, उसकी अंतिम यात्रा में प्रत्येक गांववासी शामिल हुआ।
Village dog emotional farewell: स्ट्रीट डॉग्स के खिलाफ क्रूरता की लगातार सामने आ रही खबरों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को भावुक कर दिया है। राजस्थान में एक कुत्ते की मौत पर पूरा गांव शोक में डूब गया, गाजे-बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई और 15 जनवरी को उसकी याद में भोज भी रखा जाएगा। इस कुत्ते को गांव वाले प्यार से डॉगसा बुलाते थे। उसकी मौत से पूरा गांव दुखी है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉगसा सभी का चहेता था। हर कोई उसे प्यार करता था, उसके जाने से सभी दुखी हैं।
राजस्थान के ब्यावर जिले के राजियावास गांव में रहने वाला डॉगसा करीब पांच साल का था। गांव वालों के साथ उसका एक अनोखा रिश्ता था। बताया जाता है कि गांव में किसी की मृत्यु होने पर कुत्ता अपने आप उसके घर पहुंच जाता था और अंतिम यात्रा में भी शामिल होता है। वह शमशान घाट पर तब तक रुकता, जब तक कि अंतिम संस्कार पूरा नहीं हो जाता। डॉगसा के इस सेवा भाव ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। ग्रामीणों के लिए वह परिवार का हिस्सा बन गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरपंच बृजपाल रावत ने बताया कि कुत्ते का हिंदू रीतिरिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया है। इसकी शवयात्रा आशुपुरा माता मंदिर से प्रारंभ होकर हिंदू मुक्ति धाम तक गई।
सरपंच बृजपाल रावत ने बताया कि 15 जनवरी को डॉगसा की याद में मृत्युभोज रखा गया है। उन्होंने कहा कि डॉगसा महज एक जानवर नहीं बल्कि ग्रामीणों के लिए परिवार के सदस्य की तरह था। इसलिए जब उसकी मृत्यु हुई तो हमने तय किया कि एक इंसान की तरह सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गाजे-बाजे और रामधुनी के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। उन्होंने आगे कहा कि डॉगसा सेवा-भाव और संवेदनशीलता की एक मिसाल बन चुका था। गांव में किसी की मृत्यु हो जाने पर वह पीड़ित परिवार के घर पहुंच जाता था, जैसे अपना दुख प्रकट कर रहा हो। इसके बाद वह अंतिम यात्रा में भी शामिल होता था।
डॉगसा की अंतिम यात्रा में स्थानीय सरपंच से लेकर पूरा गांव शामिल रहा। सभी ने नम आंखों से उसे विदाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि डॉगसा 5 जनवरी को सुबह सड़क किनारे मृत मिला। उसकी मौत कैसे हुई इसकी जानकारी किसी को नहीं है। 15 जनवरी को उसका 12वां कार्यक्रम (मृत्युभोज) रखा गया है। डॉगसा करीब पांच साल का था। गांव का हर सदस्य उसे परिवार की तरह मानता था और उसका अच्छे से ख्याल रखता था। डॉगसा सेवा-भाव, संवेदनशीलता और इंसानियत का ऐसा पाठ पढ़ा गया है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
वहीं, स्ट्रीट डॉग्स का मुद्दा लगातार खबरों में बना हुआ है। 7 जनवरी को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई , जो आज भी जारी रहेगी। सर्वोच्च अदालत सभी याचिकाओं को सुन रही है। स्ट्रीट डॉग्स के मुद्दे पर कपिल सिब्बल एनिमल्स लवर्स का पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि समस्या का हल वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। कुत्तों को शेल्टर में बंद रखना कोई हल नहीं हो सकता। वहीं, अदालत ने कहा कि कुत्ते का मन नहीं पढ़ा जा सकता कि वह कब काटने वाला है।