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‘भारत ने दुनिया को दिखाया मजबूत नेतृत्व’, ब्रिक्स घोषणापत्र पर आम सहमति के बाद बोले राजनाथ सिंह

Rajnath Singh BRICS: ब्रिक्स घोषणापत्र पर आम सहमति बनने के बाद राजनाथ सिंह ने भारत के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दिखाता है।
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Updated: 14 Sep 2026, 9:24 AM IST
Rajnath Singh BRICS Statement, BRICS Declaration 2026,
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो - आईएएनएस)

Rajnath Singh BRICS Statement: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बनने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के नेतृत्व की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि आम सहमति से घोषणापत्र को मंजूरी मिलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में सभी देशों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया गया। ब्रिक्स में विकासशील देशों की आवाज को भी प्रमुखता दी गई। उन्होंने इसे ज्यादा समावेशी और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की दिशा में अहम कदम बताया।

नेतृत्व का मतलब मजबूत सहमति बनाना

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि नेतृत्व का मतलब सबसे ऊंची आवाज में अपनी बात रखना नहीं है। असली नेतृत्व मजबूत सहमति बनाने में है। उन्होंने भारत की प्राचीन सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' का भी जिक्र किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में दुनिया भारत की बात सुन रही है। उनके मुताबिक, नई दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन ने भारत की बढ़ती भूमिका को सामने रखा है।

ईरान और यूएई के मतभेद के बीच बनी सहमति

ब्रिक्स घोषणापत्र पर सहमति बनाना आसान नहीं था। पश्चिम एशिया के मुद्दे पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद थे। इसकी वजह से संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक भी संयुक्त बयान के बिना खत्म हुई थी। इसके बाद शिखर सम्मेलन में भी सहमति बनाने के लिए कई दौर की बातचीत हुई।

अधिकारियों के मुताबिक, भारत ने अलग-अलग स्तरों पर बातचीत कर दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने की कोशिश की। दूसरे सदस्य देशों ने भी इस प्रयास का समर्थन किया। आखिरकार सभी देश संयुक्त घोषणापत्र पर सहमत हो गए।

140 पैराग्राफ का घोषणापत्र

नई दिल्ली घोषणापत्र में कुल 140 पैराग्राफ हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शिखर सम्मेलन के दौरान जारी किया। घोषणापत्र में नागरिक ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। इसमें उन परमाणु सुविधाओं का भी जिक्र किया गया जो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में हैं।

घोषणापत्र में ऐसे हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित एजेंसी के प्रस्तावों के खिलाफ बताया गया है। इसमें अमेरिका और इजरायल के हमलों का सीधे नाम नहीं लिया गया। हालांकि, इसकी भाषा को ईरान की चिंताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।

व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी जोर

ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखने पर भी जोर दिया। घोषणापत्र में सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने की जरूरत बताई गई।

राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति को भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि भारत अलग-अलग विचार रखने वाले देशों को साथ लाकर साझा सहमति बनाने में सक्षम है।

Updated on:
14 Sep 2026, 9:24 AM IST
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