
Rajya Sabha Election 2026: राज्य सभा की 12 सीटों के लिए चुनावी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। उत्तर प्रदेश की 10, उत्तराखंड की एक और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, इसलिए अगले 24 घंटे में मुकाबले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। राज्य सभा चुनाव के लिए पार्टियों द्वारा अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करना भी शुरू कर दिया है।
5 अक्टूबर की दोपहर तक बीजेपी ने 12 में से 2 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है, जबकि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 2 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
यूपी से समाजवादी पार्टी ने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। वहीं बीजेपी ने रविवार को अपनी लिस्ट जारी की। इसमें दो प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया। टीएमसी से बीजेपी में शामिल होने वाली कोयल मल्लिक को बंगाल और दिनेश आर्य को उत्तराखंड से उम्मीदवार बनाया है।
बता दें कि राज्य सभा की 12 सीटों में सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल उत्तर प्रदेश की 10 सीटों को लेकर है। यहां विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी सात सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवारों की जीत भी मजबूत मानी जा रही है।
यानी शुरुआती गणित में 9 सीटों पर तस्वीर काफी हद तक साफ दिखाई देती है। असली लड़ाई 10वीं सीट को लेकर है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय 397 विधायक हैं और एक राज्य सभा सीट के लिए करीब 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास इतनी ताकत है कि वह सात सीटों को आराम से निकाल सकता है। आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। दूसरी तरफ सपा के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है।
बीजेपी और सपा दोनों ही 10वीं सीट को लेकर रणनीति बना रहे हैं। सपा ने तीसरे उम्मीदवार के संकेत दिए हैं और बीजेपी भी अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। हालांकि 5 अक्टूबर की दोपहर तक दोनों दलों ने इस अतिरिक्त उम्मीदवार की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं की है।
यही सीट राज्य सभा चुनाव को दिलचस्प बना रही है। अगर दोनों तरफ से अतिरिक्त उम्मीदवार उतरते हैं तो क्रॉस वोटिंग, छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।
बीजेपी के सामने सिर्फ मौजूदा सीटों को बरकरार रखने की चुनौती नहीं है। पार्टी उत्तर प्रदेश से एक अतिरिक्त सीट जीतकर राज्य सभा में अपनी संख्या मजबूत करना चाहती है।
बीजेपी की मौजूदा रणनीति में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
हालांकि नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर होने के कारण बीजेपी के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आठवीं सीट के लिए मुकाबला किस स्तर का होगा।
उत्तराखंड की एक राज्य सभा सीट पर बीजेपी ने दिनेश आर्य को उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा में बीजेपी के मजबूत बहुमत को देखते हुए यहां मुकाबला एकतरफा रहने की संभावना है।
दिनेश आर्य लंबे समय से बीजेपी संगठन से जुड़े रहे हैं और उत्तराखंड में राज्य मंत्री के दर्जे वाले पद पर भी रहे हैं। ऐसे में बीजेपी की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इस सीट पर पार्टी की जीत मजबूत मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल की सीट पर होने वाला चुनाव इस बार खास है। यह सीट टीएमसी की पूर्व राज्यसभा सांसद रुक्मिणी उर्फ कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई है।
अब कोयल मल्लिक को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर बीजेपी की जीत तय मानी जा रही है। इस जीत के साथ बीजेपी को पश्चिम बंगाल से राज्य सभा में एक अतिरिक्त सीट मिलने की संभावना है।