
Ram Mandir Donation Theft Case : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में रोज नये खुलासे हो रहे हैं। अब खुलासा हुआ है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए 8 लोगों में से 6 कर्मचारी वाराणसी की एक सुरक्षा फर्म में नकदी गिनने के लिए कार्यरत थे। ऐसा पता चला है कि एसबीआई ने नकदी गिनने वालों को राम मंदिर में इस काम में लगवाया था, इससे भी कई सवाल पैदा हो गए हैं। राम मंदिर चढ़ावा घोटाले और ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। उधर एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन ने एफआईआर दर्ज कराई है। उन पर मंदिर की आर्थिक व्यवस्था और दान प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी है। यह बात दीगर है कि उन्होंने घोटालों के आरोप सामने आने के बाद, मंदिर के धन प्रबंधन और चढ़ावे की प्रक्रिया में किसी भी तरह की व्यक्तिगत रूप से लिप्त होने से इनकार किया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर के चढ़ावे के गबन की जांच का दायरा बढ़ाते हुए चंपत राय से पूछताछ की और अब नकदी गिनने की प्रक्रिया में निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसबीआई का कहना है कि वह इस मामले की जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। इस घटनाक्रम के बारे में एसबीआई ने कहा कि वह विशेष जांच दल के साथ सहयोग कर रहा है। बैंक ने अपने एक बयान में कहा कि वह जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बैंकिंग सेवाएं दे रहा है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के डेटाबेस में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, मिलिट्री सिक्योरिटी सर्विस नामक एजेंसी को दिसंबर 2017 में वाराणसी में पंजीकृत कार्यालय और 1 लाख रुपये की चुकता पूंजी के साथ अपने वर्तमान स्वरूप में शामिल किया गया था। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, मिलिट्री सिक्योरिटी सर्विसेज 15 राज्यों में कार्यरत है और इसके ग्राहकों में कई सरकारी कंपनियां शामिल हैं। ध्यान रहे कि अनियमितताएं सबसे पहले तब सामने आईं, जब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 13 जून को गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर के चंदे के प्रबंधन को नियंत्रित करने के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया।
प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। चढ़ावा चोरी के आरोपियों से दो घंटे तक पूछताछ की गई। अब तक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, राम शंकर यादव 'टीनू', मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, रमा शंकर मिश्रा और करुणेश पांडे शामिल हैं। सुरक्षा कंपनी का कहना है कि एसबीआई की शाखा ने 19 कर्मचारियों की तलाश की थी। पुलिस ने यह भी बताया है कि 6 आरोपियों से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक और निदेशक गौरव सिंह ने कहा है कि एजेंसी को अयोध्या में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नया घाट शाखा की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से संबंधित नकदी गिनती प्रक्रिया के लिए नियुक्त किया गया था। सिंह के हवाले से कहा गया है कि स्थानीय एसबीआई शाखा ने स्वयं 19 लोगों के नामों की सिफारिश की थी, जिन्हें बाद में नकदी गिनने वाली टीम में शामिल किया गया। सिंह ने कहा,आमतौर पर कॉर्पोरेट कार्यालय ही मांग उठाता है, लेकिन इस मामले में स्थानीय शाखा ने 19 कर्मचारियों को रखने के लिए बात की थी। लखनऊ में एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस तरह की नियुक्तियां आम तौर पर कॉर्पोरेट या केंद्रीयकृत स्तर पर की जाती हैं।
उन्होंने कहा, 'इस मामले में, शाखा ने हमसे अपने पूर्व में तैनात 19 व्यक्तियों को अपने साथ शामिल करने और उन्हें शाखा को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। हमने ऐसा ही किया। यह मांग स्थानीय शाखा द्वारा उठाई गई थी।' उन्होंने कंपनी के विकास की रूपरेखा भी बताई और कहा, 'मेरे पिता ने वर्ष 2000 में इसकी एक स्वामित्व इकाई के रूप में स्थापना की थी, फिर यह विकसित हुई और एक साझेदारी फर्म में परिवर्तित हो गई, और बाद में 2017 में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई। मैं तब निदेशक बना।'
जांचकर्ताओं का दावा है कि छिपे हुए कैमरों से मिले फुटेज में कुछ कर्मचारियों को जानबूझ कर सीसीटीवी कैमरों की नजर से ओझल होते हुए देखा गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति ने कथित तौर पर नोटों के बंडलों से नोट निकाल कर अपने कपड़ों में छिपा लिए। पुलिस का कहना है कि रिकॉर्डिंग से कथित चोरी के महत्वपूर्ण सुबूत मिले हैं और इसमें उनके शामिल लोगों की पहचान करने में मदद मिली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मंगलवार को त्याग पत्र दे चुके श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया, जबकि जांचकर्ताओं ने मंदिर परिसर में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच का दायरा बढ़ाया।
मीडिया के अनुसार अयोध्या पुलिस की ओर से अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (भ्रष्टाचार विरोधी) रजत वर्मा की अदालत में प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, आठ आरोपियों में से छह को वाराणसी स्थित सुरक्षा एजेंसी भुगतान कर रही थी। आरोपी राम शंकर यादव को ट्रस्ट से सीधे भुगतान किया जाता था, जबकि एक अन्य आरोपी श्रीवास्तव, जो एक पूर्व बैंक कर्मचारी है, वह वेतन ही नहीं लेता था।
मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा आपस में रिश्तेदार हैं और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी रिश्तेदार हैं, जिन्होंने पिछले सप्ताह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राम शंकर यादव और मनीष यादव भी रिश्तेदार हैं।
चंपत राय से पूछताछ की गई, सुरक्षाकर्मी भी जांच के दायरे में हैं। इसी बीच, अयोध्या पुलिस ने मंगलवार को चल रही जांच के तहत चंपत राय का बयान दर्ज किया। इस जांच का नेतृत्व कर रहे अयोध्या सर्कल ऑफिसर आशुतोष तिवारी ने कारसेवकपुरम स्थित राय के भारत कुटी आवास का दौरा किया और कथित चोरी से संबंधित दस्तावेज और विवरण मांगे। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अदालत से अनुमति प्राप्त करने के बाद आरोपी अविनाश शुक्ला से जिला जेल में पूछताछ की। सूत्रों ने एजेंसी को बताया कि ट्रस्ट ने 5 जून को शुक्ला से 20 लाख रुपये बरामद किए थे।
बहरहाल अब जांच का दायरा बढ़ाकर राम मंदिर परिसर में तैनात लगभग 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांचकर्ता ड्यूटी रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश और निकास रिकॉर्ड और प्रवेश बिंदुओं, दर्शन मार्गों और दान परिवहन मार्गों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के बयानों की जांच कर रहे हैं ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।