
India-Bangladesh Relations: गंगा जल समझौते की समयसीमा खत्म होने में करीब दो महीने का समय बाकी रह गया है। ऐसे में बांग्लादेश इस समझौते को जल्द से जल्द रिन्यू करने के बजाय नई संधि चाहता है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल का कहना है कि गंगा सहित सभी साझा नदियों से जुड़े मुद्दे जॉइंट रिवर्स कमीशन (JRC) के फ्रेमवर्क के तहत होते हैं। वहीं, बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदउद्दीन चौधरी एनी ने उम्मीद जताई है कि 12 दिसंबर से पहले भारत के साथ एक नए समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि (Ganga Water Sharing Treaty) 12 दिसंबर 1996 को हुई थी। यह 30 साल के लिए थी और दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। यह फरक्का बैराज पर सूखे के समय पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। अब इस संंधि पर बांग्लादेश इसे रिन्यू करने के बजाय नई संधि चाहता है। वह इसमें गारंटी क्लॉज (guarantee clause) शामिल करना चाहता है ताकि उन्हें उनके हिस्से का पानी सुनिश्चित रूप से मिलता रहे।
बांग्लादेश इस नई जल संधि के माध्यम से चाहता है कि 1977 की पुरानी अस्थायी संधि में एक प्रावधान था कि फरक्का पर गंगा का प्रवाह बहुत कम हो जाए तो भी बांग्लादेश को उसके निर्धारित हिस्से का 80 फीसदी पानी मिलना सुनिश्चित रहेगा। लेकिन 1996 की मौजूदा संधि में यह क्लॉज नहीं है। इसलिए बांग्लादेश इसे सबसे बड़ी प्राथमिकता बता रहा है। वहीं सूखे के समय पर्याप्त पानी की गारंटी चाहता है। इसलिए वह एक नई और लंबी अवधि की की संधि करना चाहता है।
बांग्लादेश के इस रूख पर रणधीर जयसवाल ने ब्रिफिंग के दौरान बताया कि नदी और पानी से जुड़े सभी मामलों पर बातचीत जॉइंट रिवर्स कमीशन के फ्रेमवर्क के अंदर होती है। इसलिए उन्हें इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है। वहीं, भारत बाग्लादेश के बीच ट्रेड के मामले में उन्होंने कहा कि इंडिया-बांग्लादेश जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेड की मीटिंग कल और आज नई दिल्ली में हुई है। मीटिंग जॉइंट सेक्रेटरी लेवल पर हो रही है और बातचीत का फोकस ट्रेड मामलों और अलग-अलग मुद्दों पर है।