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1984 Anti Sikh Riots: 1984 के जख्मों की याद दिलाकर कांग्रेस पर बरसीं रेखा गुप्ता, पूछा- सिख परिवारों को कब मिलेगा इंसाफ?

1984 Sikh Massacre: 1984 की हिंसा के 42 साल बाद भी सिख परिवारों को न्याय मिलने का सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में है। दिल्ली की पदयात्रा में रेखा गुप्ता और हरदीप सिंह पुरी ने 2733 मौतों का मुद्दा उठाकर कांग्रेस से कई सवाल किए। आखिर 1 नवंबर की तारीख पर इतना विवाद क्यों खड़ा हुआ?
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Updated: 1 Nov 2026, 2:44 PM IST
1984 Anti Sikh Riots
1984 Anti Sikh Riots : 984 के जख्मों की याद दिलाकर कांग्रेस पर बरसीं रेखा गुप्ता, पूछा- सिख परिवारों को कब मिलेगा इंसाफ? (फोटो सोर्स: ANI)

Sikh Genocide 1984: दिल्ली में 1 नवंबर को आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम के बीच 1984 के सिख विरोधी हिंसा का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस तारीख को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि जिस दिन हजारों सिख परिवार अपने अपनों को खोने की बरसी याद करते हैं, उसी दिन राजनीतिक आयोजन करना उनकी भावनाओं को आहत कर सकता है।

दिल्ली में पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक निकाली गई पदयात्रा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हिस्सा लिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। रेखा गुप्ता ने कहा कि आज संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वालों को पहले 1984 की घटनाओं पर जवाब देना चाहिए।

1984 Sikh Massacre: दशकों बाद भी न्याय की राह देख रहे पीड़ित परिवार

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 1984 की हिंसा में हजारों सिख परिवारों ने अपने परिजनों को खोया था। कई दशक गुजर जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन परिवारों के दर्द को लेकर कितनी बार संवेदनशीलता दिखाई है? उनके मुताबिक, सिख समुदाय आज भी अपने साथ हुई घटनाओं का जवाब मांग रहा है।

रेखा गुप्ता ने अपने बयान में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1975 में लगाए गए आपातकाल और 1984 की हिंसा का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निर्वाचित सरकारों को चुनौती देकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पदयात्रा में शामिल सिख समुदाय के लोगों की मांग है कि उन्हें न्याय कब मिलेगा और उनकी शिकायतों का समाधान कब होगा।

हरदीप पुरी ने 2733 मौतों का आंकड़ा उठाया

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी 1984 की घटनाओं को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उस दौरान 2,733 लोगों की जान गई थी। पुरी ने कहा कि आमतौर पर इस घटना को दंगा कहा जाता है, लेकिन उनके विचार में इसे नरसंहार कहा जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें 1984 की सामूहिक हत्याओं को मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा गया था।

पुरी ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कई तारीखें उपलब्ध थीं, तो 1 नवंबर का दिन ही क्यों चुना गया? उन्होंने कहा कि पार्टी को इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

क्या कहता है 1984 की हिंसा का आधिकारिक रिकॉर्ड?

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख सुरक्षा गार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद, दिल्ली समेत कई शहरों में सिख समुदाय पर भयानक हिंसा फूट पड़ी। संसद में गृह मंत्रालय ने बताया कि अकेले दिल्ली में 2,733 सिखों की जान गई। ये संख्या आहूजा समिति की रिपोर्ट के आधार पर बताई गई थी।

इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया भी सालों तक सुर्खियों में रही। 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 1984 की ये हत्याएं इंसानियत के खिलाफ अपराध थीं। कोर्ट ने साथ ही, राजनीतिक संरक्षण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सख्त टिप्पणी की थी।

इसी वजह से 1 नवंबर को आयोजित पदयात्रा में 1984 की हिंसा, पीड़ित परिवारों को न्याय और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों ने खासा जोर पकड़ा। इस पूरी बहस के बीच, कांग्रेस और विपक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक बातें, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों की चर्चा अलग से करते रहे।

Updated on:
1 Nov 2026, 2:44 PM IST
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