
Celebrity Deepfake: बॉम्बे हाई कोर्ट से बुधवार को एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने विभिन्न प्लेटफार्म पर एक्ट्रेस से जुड़े सभी डीपफेक, मॉर्फ की गई तस्वीरें, फेक वीडियो और दूसरे अनाधिकृत ऑनलाइन कंटेंट हटाने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का गलत इस्तेमाल किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर असर डालता है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को सही मानने हुए एक्ट्रेस को अंतरिम राहत दी।
मामले में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने डीपफेक और मॉर्फिंग किए गए विज़ुअल्स के माध्यम से उन्हें दिखाने वाले वीडियो, इमेज और चैटबॉट-स्टाइल इंटरेक्शन का जिक्र किया था। एक्टर के वकील वेंकटेश धोंड ने लगभग 275 वेबसाइटों की ओर इशारा किया, जिनमें एक्ट्रेस के चेहरे जैसी शक्ल-सूरत का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड, मॉर्फ की गई या सुपरइम्पोज कर तैयार की गई इमेज और वीडियो मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ऐसा मटीरियल उनके पर्सनैलिटी, पब्लिसिटी और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
कोर्ट ने कहा कि एक्ट्रेस प्रीति जिंटा का बीते 25 से ज्यादा वर्षों से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में जाना पहचाना नाम है। अपने करियर के दौरान उन्होने अपनी एक सार्वजनिक पहचान बनाई है। कोर्ट ने कहा कि अनाधिकृत कंटेंट में उनकी इमेज, शक्ल-सूरत और तौर-तरीकों का अनधिकृत इस्तेमाल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है जो उनके अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।
जस्टिस माधव जामदार की सिंगल बेंच ने ऑनलाइन प्लेटफार्म्स को 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स' के तहत उनकी जरूरी सावधानी बरतने की जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई। कोर्ट ने ऐसे कंटेंट से निपटने में मध्यस्थों की भूमिका का मुद्दा भी उठाया, क्योंकि उनके प्लेटफार्म का भी गलत इस्तेमाल हो रहा था। मामले में कोर्ट ने कहा कि यदि मध्यस्थ कार्रवाई करना शुरू कर दें, तो ऐसे अपराधी रुक जाएंगे। वरना, आप इस देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने में शामिल हैं। बेंच ने अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर एक्ट्रेस प्रीति जिंटा की ऐसी सभी अनधिकृत और फेक इमेज और वीडियो को तुरंत हटाने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि मॉर्फ और सुपरइम्पोज कर किए गए कंटेंट को बनाने से एक्ट्रेस के पर्सनैलिटी अधिकार, पब्लिसिटी अधिकार और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। कोर्ट ने कहा कि ये अधिकार अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी की संवैधानिक गारंटी और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से मिलते हैं। जिसमें सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है।