
Rohini Acharya on Chirag Paswan: बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने केंद्रीय मंत्री और लोजपा (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान पर निशाना साधा है। हाल ही में एक इंटरव्यू में चिराग पासवान ने राज्य की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताई थी और कहा था कि उन्हें ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है। जिसे लेकर रोहिणी आचार्य ने कहा कि अगर चिराग पासवान को सच में इतनी शर्म आती है, तो वे इस्तीफा देने के लिए किस शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं?
चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने लिखा, "इस्तीफा देने के लिए किस शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं चिराग पासवान जी? शर्म का बोझ उठा कर भी सत्ता का हिस्सा बने रहना कोई चिराग पासवान जी से सीखे, बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से असुरक्षित हो चुके बिहार की वजह से जब सरकार का हिस्सा होने में उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो ही रही है, तो इस्तीफा देने की हिम्मत कौन से मुहूर्त के इंतजार में रुकी हुई है?"
चिराग पासवान पर तंज कसते हुए रोहिणी आचार्य ने आगे लिखा, "सिर्फ बयानों में दुख जताना और मगरमच्छ के आंसू बहाना चिराग पासवान जी की पुरानी आदत और ड्रामा है। जब सब कुछ असहज, असहनीय और शर्मिंदगी भरा है ही, तो क्या इस्तीफा पत्र पर दस्तखत करने के लिए किसी के द्वारा जारी किए जाने वाले एनओसी (NOC) का इंतजार कर रहे हैं चिराग पासवान जी?
दरअसल में, यह पूरा विवाद चिराग पासवान के एक इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि बिहार में अपराधी बेखौफ होकर काम कर रहे हैं और दलित व बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो चिराग ने कहा कि आजकल कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा, "सरकार का एक सहयोगी और हिस्सा होने के नाते मैं खुद इस सवाल से नहीं भाग सकता। मुझे खुद शर्मिंदगी होती है जब मैं सोचता हूं कि मैं एक ऐसी सरकार के साथ हूं जहां ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यह चिंता का विषय है और इसे कतई हल्के में नहीं लिया जा सकता।"
कड़े फैसले लेने के बारे में पूछे जाने पर चिराग पासवान ने कहा, "मैं आक्रोशित हूं और ऐसा होना स्वाभाविक भी है। एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं, राष्ट्रीय स्तर पर मेरे बिहार की कैसी छवि जा रही है? सोचिए हमारी बेटियों में कैसा डर और असुरक्षा का माहौल बन गया होगा। आज कोई ऐसी बच्ची बता दीजिए जो शाम को घर से बाहर निकलने से पहले 100 बार न सोचती हो? ऐसे में जिस सरकार का मैं हिस्सा हूं, मेरी वह सरकार अगर सेंस ऑफ सिक्योरिटी न दे, तो यह मैं कतई स्वीकार नहीं करूंगा।"