
Rohini Acharya on MLC Devesh Kumar resignation: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और राज्य सरकार में मंत्री के बेटे दीपक प्रकाश की सदस्यता को लेकर चल रही चर्चा के बीच BJP MLC देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया सोशल मीडिया पर BJP और NDA पर निशाना साधा। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अपनी गिरती साख बचाने के लिए बीजेपी ने जल्दबाजी में एक 'बलि का बकरा' ढूंढ लिया।
NDA पर तंज कसते हुए रोहिणी आचार्य ने लिखा कि BJP-NDA के भीतर यह तथाकथित नैतिकता तभी जागी जब कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को कैबिनेट में एक फायदेमंद पद पर बनाए रखने के लिए BJP MLC देवेश कुमार को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर करना, गठबंधन को किसी भी कीमत पर बचाने की कोई अनोखी रणनीति थी?
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, "न्यायालय की तल्ख़ टिप्पणी से साख पर बट्टा लगा, तो आनन-फ़ानन में 'कुर्बानी का बकरा' ढूंढ निकाला गया। सुप्रीम कोर्ट से 'कानूनी फटकार' का प्रसाद मिलते ही भाजपा-एनडीए के बीच जो नैतिकता अचानक जागृत हुई है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। उपेंद्र कुशवाहा जी के सुपुत्र को मंत्रिमंडल की मलाईदार सीट पर बरकरार रखने के लिए बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा लेना 'कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ' की नीति का एक नायाब उदाहरण है।"
इस पूरे राजनीतिक घटना की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका से हुई, जिसमें दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने को चुनौती दी गई थी, जबकि वे विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, कोई व्यक्ति विधान परिषद या विधानसभा का सदस्य बने बिना अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है। दीपक प्रकाश के मामले में यह छह महीने की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि दीपक प्रकाश किसी भी सदन का सदस्य न होते हुए भी इतने लंबे समय तक मंत्री कैसे बने रह सकते हैं? कोर्ट के इस कड़े रुख ने राज्य सरकार और NDA के लिए संवैधानिक संकट पैदा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बीजेपी विधायक मनोज शर्मा और देवेश कुमार के साथ शुक्रवार को विधान परिषद पहुंचे। इसके बाद, देवेश कुमार ने विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। गौरतलब है कि देवेश कुमार को 17 मार्च 2021 को राज्यपाल कोटे से विधान परिषद का सदस्य (MLC) मनोनीत किया गया था और उनका कार्यकाल 17 मार्च 2027 तक था। उन्होंने अपने कार्यकाल के लगभग आठ महीने शेष रहते हुए इस्तीफा दिया।
बीजेपी के एक MLC के इस्तीफे के बाद दीपक प्रकाश के लिए बिहार सरकार में मंत्री बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई गवर्नर कोटे की सीट के लिए दीपक प्रकाश को नॉमिनेट करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है।