
CJP Protest RSS leader Atul Limaye: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी अतुल लिमये ने इस आंदोलन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे एंटी-कॉन्स्टिट्यूशन और एंटी-नेशनल बताया है।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए लिमये ने कहा कि इस प्रदर्शन को एक केस स्टडी की तरह समझने की जरूरत है। उन्होंने राइट विंग संगठनों से आंदोलन की पूरी प्रक्रिया और इसके पीछे के समर्थन तंत्र का विश्लेषण करने की अपील की।
अतुल लिमये ने दावा किया कि शुरुआत में यह आंदोलन छात्रों की स्वाभाविक नाराजगी से जुड़ा था। NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों में गुस्सा था। लेकिन बाद में यह आंदोलन अलग दिशा में चला गया। लेफ्ट विचारधारा से जुड़े संगठनों ने इस प्रदर्शन को अपने प्रभाव में ले लिया। इसके बाद आंदोलन का स्वरूप बदल गया और इसमें राजनीतिक मुद्दे शामिल हो गए।
उन्होंने आगे कहा कि छात्र शक्ति को सही दिशा में इस्तेमाल करना जरूरी है। ABVP जैसे संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों की ऊर्जा को सकारात्मक कामों की ओर ले जाएं।
लिमये ने CJP आंदोलन के पीछे मौजूद संगठनों और समर्थन को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत, इसके विस्तार और इसमें शामिल समूहों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि CJP नेता अभिजीत दिपके के भारत लौटने के बाद शुरुआत में आंदोलन को ज्यादा समर्थन नहीं मिला। लेकिन 20 जून के बाद इसमें तेजी आई और बड़ी संख्या में लोग जुड़ने लगे। RSS नेता ने सवाल उठाया कि इस बदलाव के पीछे कौन से कारण थे और किन संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया।
अतुल लिमये ने अपने संबोधन में डॉ. बी. आर. अंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ एनार्की’ भाषण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी गतिविधियों से सावधान रहने की जरूरत है, जो व्यवस्था को कमजोर कर सकती हैं।
उन्होंने योगेंद्र यादव के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सड़कों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की भूमिका पर भी चर्चा जरूरी है।
लिमये ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और भाषा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विरोध का तरीका भी लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए। फिलहाल CJP प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।