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RSS Registration Issue: कागज है तो मेरे मुंह पर फेंक कर मारो- मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस को फिर ललकारा

RSS Registration Issue: कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के रजिस्ट्रेशन और कानूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर संगठन के पास दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही की मांग भी की।

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Karnataka Minister Priyank Kharge
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे (फोटो- एएनआई)

RSS Registration Issue: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन को लेकर कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे और संघ के बीच विवाद तेज हो गया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत को खुले पत्र लिखने के बाद अब प्रियांक खड़गे ने फिर से संघ के रजिस्ट्रेशन पेपर सार्वजनिक करने की मांग की है। मीडिया बातचीत के दौरान खरगे ने कहा कि अगर RSS के पास कानूनी दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। खड़गे ने कहा कि उनका सवाल पूरी तरह संवैधानिक है और उन्होंने कहीं भी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही। उनका बयान ऐसे समय आया है जब RSS अपने 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है और संगठन की कानूनी स्थिति को लेकर बहस शुरू हो गई है।

वह सही निकले तो मैं माफी मांगूंगा - खरगे

प्रियांक खरगे ने संघ प्रमुख को लिखे अपने पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि पत्र बिल्कुल साफ है। मेरे राज्य में उन्होंने 500 से ज्यादा यूनिफॉर्म मार्च किए हैं और रोजाना 4 हजार से ज्यादा शाखाएं चल रही हैं। मैं सिर्फ यह पूछ रहा हूं कि जब आप रजिस्टर्ड संगठन नहीं हैं तो किस कानून के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मुझे इसमें कुछ भी गैरतार्किक या असंवैधानिक नहीं दिखता। अगर आपके पास कागज हैं तो मेरे मुंह पर फेंक कर मारो। अगर उनका स्पष्टीकरण सही निकला तो मैं माफी मांगूंगा। अगर उनका स्पष्टीकरण सही नहीं है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए। खरगे ने साफ किया कि उन्होंने पत्र में कहीं भी RSS पर प्रतिबंध लगाने या कर्नाटक सरकार द्वारा बैन की बात नहीं लिखी।

खरगे ने संघ प्रमुख को लिखा था पत्र

कर्नाटक मंत्री ने कहा कि किसी भी संगठन को संविधान के तहत ही काम करना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी सवाल किया कि क्या मैंने कब हिंदू धर्म के रजिस्ट्रेशन की बात की है। खरगे ने आगे कहा कि यह एक संगठन है और किसी भी संगठन को संविधान के दायरे में ही काम करना चाहिए। बता दें कि हाल ही में प्रियांक खरने ने संघ प्रमुख को खुला पत्र लिखकर उसके रिजस्ट्रेशन के कागज सार्वजनिक करने की मांग की थी।

संवैधानिक जवाबदेही दिखाए संघ - खरगे

कर्नाटक मंत्री ने अपने खुले पत्र में लिखा था कि जिस संगठन के पास 60 हजार से ज्यादा शाखाएं और करोड़ों स्वयंसेवक होने का दावा है, उसे पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही भी दिखानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिक, ट्रस्ट, एनजीओ, कंपनियां और मंदिरों को कानून के तहत रजिस्ट्रेशन और वित्तीय जानकारी देनी पड़ती है, तो RSS इससे अलग क्यों रहे। खरगे ने अपने पत्र में दावा किया था कि कर्नाटक में RSS की 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 562 रूट मार्च आयोजित किए गए हैं।

मोहन भागवत ने जवाब देने से इनकार किया

प्रियांक खरगे के इस पत्र का जवाब देने से इनकार करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा कि संघ खुलकर काम करता है और इसमें कुछ भी गुप्त नहीं है। भागवत ने कहा कि हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है और RSS का संविधान 1950 के दशक में सरकार को सौंपा जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अतीत में RSS पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार संगठन के अस्तित्व को मान्यता देती है।

Updated on:
17 Jun 2026 04:05 pm
Published on:
17 Jun 2026 03:38 pm