
RSS Registration Row: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन और कानूनी स्थिति को लेकर कर्नाटक में एक नया विवाद शुरू हो गया है। कर्नाटक सरकार की ओर से RSS से कानूनी दर्जा, फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल पूछे जाने के बाद कांग्रेस नेताओं ने संघ पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। इसी बीच कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद का नया बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि हिंदू धर्म और RSS की विचारधारा एक जैसी नहीं हो सकती। अरशद ने RSS को भेदभाव करने वाली और हिंसक संस्था बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म की मूल भावना समावेशी और उदार है, जबकि संघ की सोच उससे पूरी तरह अलग है।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद ने कहा कि हिंदू धर्म RSS से बहुत अलग है। RSS के सिद्धांत हिंदू धर्म के सिद्धांतों के विपरीत हैं। वास्तव में हिंदू धर्म सबसे उदार, समावेशी, सभी को साथ लेकर चलने वाला और पवित्र धर्म है। लेकिन अरशद के मुताबिक RSS एक भेदभाव करने वाली, निशाना बनाने वाली और हिंसक संस्था है। उन्होंने आगे कहा कि किसी संगठन की तुलना RSS से कैसे की जा सकती है। अरशद के इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हिंदू धर्म को RSS की विचारधारा से जोड़ना गलत है और दोनों की प्रकृति अलग-अलग है। भाजपा और संघ समर्थकों ने इस बयान को राजनीतिक हमला बताया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग स्रोत और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। खरगे ने कहा कि कर्नाटक में RSS की 60 हजार से ज्यादा शाखाएं और गतिविधियां चल रही हैं, इसलिए इतने बड़े संगठन का कानूनी निगरानी से बाहर रहना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संस्था कानून और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। खरगे ने पत्र में संगठन की आय, दान, संपत्ति, टैक्स भुगतान और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति से जुड़ी जानकारी की भी मांग की है।
प्रियांक खरगे के इस पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इसे राजनीतिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि RSS को सरकारी फंड नहीं मिलता, इसलिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। भागवत ने कहा कि संघ पिछले 100 वर्षों से काम कर रहा है और पहले कभी किसी सरकार ने रजिस्ट्रेशन की मांग नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि कई संस्थाएं बिना रजिस्ट्रेशन के काम करती हैं और हिंदू धर्म खुद भी रजिस्टर्ड नहीं है। भागवत के अनुसार RSS की सभी गतिविधियां खुलकर होती हैं और संगठन ने 1960 के दशक में अपना संविधान सरकार को सौंप दिया था, जिसे स्वीकार भी किया गया था।