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‘हम सदन में बोल नहीं पाएंगे, सत्र नहीं चलेगा तो कहां बैठेंगे?’, ममता बनर्जी गुट के TMC विधायक ने सरकार से मांगी मदद

TMC Leader Madan Mitra: तृणमूल कांग्रेस के नेता मदन मित्रा ने कहा, जब सत्र नहीं चल रहा होगा तो हम कहां बैठेंगे? इसलिए, हमें एक कमरे की ज़रूरत है।

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TMC Leader Madan Mitra

TMC नेता मदन मित्रा

Mamata Banerjee Opposition Group Allotment: पश्चिम बंगाल की राजनीति और विधानसभा के भीतर विपक्ष के दर्जे को लेकर जारी कानूनी व सियासी जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। एक तरफ कलकत्ता हाई कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को बड़ा झटका लगा है, तो दूसरी तरफ टीएमसी के बागी धड़े को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के बाद सदन के भीतर बैठने और बोलने के समय को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता गुट को झटका

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को कलकत्ता हाई कोर्ट से उस समय बड़ा सियासी झटका लगा, जब अदालत ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष में ऐसा कोई मजबूत आधार नहीं दिखता, जिसके चलते स्पीकर के फैसले पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के निर्णय को बरकरार रखते हुए दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है।

विपक्ष से भीख नहीं मांगेंगे, सीएम से मिला हक- मदन मित्रा

अदालती झटके और विपक्ष का दर्जा किसी दूसरे गुट (बागी विधायक) को मिलने के बाद टीएमसी के फायरब्रांड नेता मदन मित्रा ने पार्टी की नई रणनीति और चिंताओं को सामने रखा है। मदन मित्रा ने विधानसभा परिसर में अपने विधायकों के बैठने और सदन में बोलने के अधिकार पर सरकार से मदद मांगी।

'सत्र नहीं चल रहा होगा, तो हमारे विधायक कहाँ बैठेंगे?'

मदन मित्रा ने सीधे शब्दों में कहा, 'ममता बनर्जी हमारी नेता हैं और हम एक स्थापित राजनीतिक दल हैं, लेकिन विपक्ष बनाने का मौका किसी और गुट को दे दिया गया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा होगा, तो हमारे विधायक कहाँ बैठेंगे? हमें परिसर में एक कमरे की ज़रूरत है।

'विधानसभा में बोल नहीं पाएंगे, तो वोटर पूछेंगे कि वहां क्यों जा रहे हैं'

उन्होंने आगे कहा कि अगर वे सदन में जनता की आवाज नहीं उठा पाएंगे, तो उनके मतदाता उनसे जवाब मांगेंगे। इसीलिए टीएमसी ने तय किया है कि वे नए विपक्ष के सामने समय के लिए हाथ फैलाने के बजाय सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गुहार लगाएंगे। मदन मित्रा के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनकी चिंताओं को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री को निर्देश दिए हैं कि टीएमसी विधायकों को सदन में बोलने के लिए पर्याप्त समय आवंटित किया जाए। कोर्ट के इस रुख और टीएमसी की नई रणनीति के बाद बंगाल विधानसभा का आगामी सत्र बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं।

ईडी ने मदन मित्रा से पूछताछ की, घर सहित छह ठिनानों की तलाशी

आपको बता दे कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा से जुड़े कम से कम छह ठिकानों पर नौकरी के बदले सोना देने के घोटाले के सिलसिले में तलाशी ली। आरोप है कि मित्रा ने सोने और नकदी के बदले विभिन्न नगरपालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दीं। बताया जाता है कि उन्होंने बिचौलियों के माध्यम से रिश्वतें एकत्र कीं और कमरहटी और पड़ोसी टीटागढ़ के नगर निकायों में नियुक्तियां करवाईं।