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Telegram Ban Case Hearing: टेलीग्राम के वकील ने कहा-‘लीक हुआ पेपर असली नहीं था,मामले की सही जांच नहीं की गई’, जज ने पूछा-आपको कैसे पता ? अदालत ने फैसला सुर​क्षित रखा

Telegram shutdown High Court hearing: नीट पेपर लीक और टेलीग्राम बंद होने पर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जज ने वकील से ऐसे सवाल पूछे कि वकील सोच में पड़ गए। जब वकील ने जज से कहा- लीक हुआ पेपर असली नहीं था,तब जज ने पूछ सवाल पूछा कि यह बात आपको कैसे पता चली?

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भारत

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MI Zahir

Jun 18, 2026

NEET Paer leak Telegram Ban Case News

नीट पेपर लीक होने के बाद टेलीग्राम पर पाबंदी और हाईकोर्ट में सुनवाई। (प्रतीकात्मक फोटो:AI)

Telegram Ban Case : देश में नीट पेपर लीक व टेलीग्राम बंद होने के बाद मामला कोर्ट में है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को टेलीग्राम की ओर से दायर एक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें 21 जून को होने वाली नीट 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले पेपर लीक रोकने के लिए देश में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच को 22 जून तक अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अहम बात यह रही कि टेलीग्राम के वकील ने लीक पेपर असली व प्रकरण जांच सही ढंग से नहीं होने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया और मामला सरकार पर डाल दिया।

क्या 15 करोड़ यूजर्स के अधिकारों को अवरुद्ध किया जा सकता है : जज

टेलीग्राम के वकील ने कहा- लीक हुआ पेपर असली नहीं था, इस पर जज ने पूछ लिया यह बात आपको कैसे पता? सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने केंद्र सरकार से मौखिक रूप से सवाल पूछा कि क्या 15 करोड़ यूजर्स के अधिकारों को केवल इसलिए अवरुद्ध किया जा सकता है क्योंकि नागरिकों का एक समूह नीट परीक्षा के उम्मीदवार) परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

अदालत ने टेलीग्राम को शाम 7 बजे तक का समय दिया

मामले में न्यायाधीश ने टेलीग्राम को शाम 7 बजे तक का समय देते हुए मौखिक रूप से यह भी पूछा कि क्या उसने कथित पेपर लीक रोकने के लिए वास्तविक समय की निगरानी जैसे पर्याप्त कदम उठाए थे। न्यायाधीश ने प्लेटफॉर्म से पूछा, 'क्या आपकी संरचना ऐसी है कि कम प्रतिबंधात्मक उपाय आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं? "

मामले की गहराई से जांच नहीं की गई : टेलीग्राम

टेलीग्राम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म के खिलाफ आपातकालीन प्रावधान यानि सूचना तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया व सुरक्षा उपाय नियम 9 लागू करने के लिए सचिव की संतुष्टि अत्यंत महत्वपूर्ण थी। हालांकि उनका दावा है कि मामले की गहराई से जांच नहीं की गई, कोई स्वतंत्र संतुष्टि दर्ज नहीं की गई और नामित अधिकारी ने केवल आरोपों को दोहराया।

'क्या टेलीग्राम उठाए गए कदमों से सरकार को संतुष्ट करने में सक्षम था ?'

जज ने वकील से पूछा कि क्या टेलीग्राम सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में संतुष्ट करने में सक्षम था। उन्होंने टेलीग्राम से कहा, आप संविधान धारा के शब्दों को रट नहीं सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इस नजरिये की आलोचना की है, आपको मैटर को देखना होगा और फिर यह कहना होगा कि प्राप्त संतुष्टि सामग्री के आधार पर है। केंद्र सरकार आपत्तिजनक पोस्ट्स हटाने की मांग कर सकती है, न कि प्लेटफॉर्म पर 'असंतुलित', व्यापक प्रतिबंध लगाया जाए।

जज ने टेलीग्राम से पूछ लिया ऐसा सवाल

न्यायाधीश ने टेलीग्राम से पूछा,आप एक मध्यस्थ होने के नाते, आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत उचित सावधानी बरतनी होगी। धारा 79 एक स्वतंत्र दायित्व है, इसका आईटी अधिनियम की धारा 69ए (अवरोधक शक्ति) से कोई संबंध नहीं है,मान लीजिए कि कोई दस्तावेज लीक हो जाता है और वह वायरल हो जाता है, तो आप वास्तविक समय में इसकी निगरानी कैसे कर सकते हैं? शिकायत मिलने के बाद जब तक कार्रवाई होती है, तब तक नुकसान हो चुका होता है। आपके प्लेटफॉर्म पर वास्तविक समय में किस प्रकार की निगरानी है ?

इस केस में केंद्र सरकार ने हलफनामे में यह कही अहम बात

केंद्र सरकार की ओर से दिए गए शपथ पत्र में कहा गया कि टेलीग्राम में कुछ ऐसी तकनीकी और वास्तुशिल्पीय विशेषताएं हैं जो इसे अन्य मध्यस्थों से अलग करती हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की इस प्लेटफॉर्म पर गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने, पता लगाने और उनकी जांच करने की क्षमता को काफी हद तक प्रभावित करती हैं, टेलीग्राम एक समर्पित बॉट इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो लगातार मानवीय हस्तक्षेप के बिना कार्य करने में सक्षम स्वचालित खातों के निर्माण और तैनाती को सक्षम बनाता है। ये बॉट स्वचालित रूप से सामग्री प्रसारित कर सकते हैं, यूजर्स को चैनलों पर पुनर्निर्देशित कर सकते हैं,बल्क में संदेश भेज सकते हैं, जानकारी एकत्र कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर अन्य कार्य कर सकते हैं ।

एक बार बॉट ब्लॉक कर दें तो चैनल मिरर कर सकता है : सॉलिसिटर जनरल

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक बार बॉट को ब्लॉक कर दिया जाए, तो वह चैनल मिरर कर सकता है, यानी वह स्वचालित रूप से दूसरे बॉट पर रीडायरेक्ट हो जाता है। किसी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती, नतीजतन व्यक्तिगत बॉट्स के खिलाफ निर्देशित प्रवर्तन उपायों का अक्सर केवल अस्थायी प्रभाव होता है, जिससे गैर कानूनी गतिविधि फिर से उभर सकती है और काफी हद तक उसी तरह से काम करना जारी रख सकती है।

टेलीग्राम ऐप का आर्किटेक्चरल डिज़ाइन अलग : एसजीआई

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद भारत में पुनः नीट परीक्षा के लिए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए के तहत एक अधिसूचना जारी कर 22 जून, 2026 तक सीमित अवधि के लिए टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। एसजीआई ने तर्क दिया कि टेलीग्राम ऐप का आर्किटेक्चरल डिज़ाइन अलग है। इस प्लेटफॉर्म पर जो किया जाता है, वह दूसरे प्लेटफॉर्म पर नहीं किया जा सकता।

परीक्षा के बाद पेपर लीक के सुबूत के लिए ऐसा किया गया

एनटीए के अनुसार इस अवधि में नीट (यूजी) 2026 की पुनः परीक्षा का दिन और उसके तुरंत बाद का समय शामिल है। इस निर्देश में प्लेटफॉर्म को भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के संपादन की सुविधा को 30 जून, 2026 तक एक निश्चित अवधि के लिए निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश उस विशिष्ट संरचनात्मक विशेषता के संंबंध में है जिसके माध्यम से इस प्लेटफॉर्म का उपयोग राष्ट्रीय परीक्षाओं के संबंध में परीक्षा के बाद पेपर लीक के सुबूत के लिए ऐसा किया गया है।

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