S Jaishankar Reaction on President Draupadi Murmu Protocol Violation: पश्चिम बंगाल दौरे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे देश के सर्वोच्च पद की गरिमा पर हमला बताते हुए टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया। जानें पीएम मोदी और मायावती ने क्या कहा।
S Jaishankar Reaction on President Draupadi Murmu West Bengal Visit Row: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन ने देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की तीखी टिप्पणी और पीएम नरेंद्र मोदी के बाद, अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल की अनदेखी करना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा पर एक अभूतपूर्व प्रहार है। उन्होंने कहा कि इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है। जयशंकर के अनुसार, यह घटना टीएमसी सरकार के उस व्यवहार को दर्शाती है जो आदिवासी समुदायों के प्रति अनादर से भरा है, जबकि उनकी संस्कृति और विरासत सर्वोच्च सम्मान की हकदार है।
विदेश मंत्री से पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के आदर्शों और मान-मर्यादा के अनुरूप प्रत्येक नागरिक और संस्था के लिए राष्ट्रपति पद का सम्मान करना तथा उनके प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पद का राजनीतिकरण करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मायावती ने आगे कहा कि वर्तमान राष्ट्रपति महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं, ऐसे में बंगाल दौरे के दौरान उनके साथ जो हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक जनसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बंगाल सरकार ने देश की राष्ट्रपति का घोर अपमान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू संथाल समुदाय के एक अत्यंत पावन उत्सव में सम्मिलित होने बंगाल गई थीं, लेकिन सम्मान देने के बजाय टीएमसी ने इस महत्वपूर्ण आयोजन का बहिष्कार करना चुना। उन्होंने इसे केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि भारत के संविधान का अपमान करार दिया।
पूरा विवाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बागडोगरा हवाई अड्डे के पास आयोजित आदिवासी समुदाय के एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। इस आयोजन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों की अनुपस्थिति पर राष्ट्रपति ने स्वयं हैरानी और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सार्वजनिक मंच से सवाल उठाया कि आखिर अंतिम समय में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थल को क्यों बदला गया।
संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रोटोकॉल का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्यतः राष्ट्रपति के राज्य दौरे पर मुख्यमंत्री द्वारा उनका स्वागत किया जाता है और कैबिनेट मंत्री भी उपस्थित रहते हैं। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि न तो मुख्यमंत्री कार्यक्रम में पहुँचीं और न ही राजभवन में हुए बदलावों के कारण राज्यपाल उपस्थित हो सके।