Statutory Bail: केरल चुनाव से पहले सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में पिनाराई सरकार को बड़ा झटका लगा है। पुलिस 90 दिन में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई, जिससे मुख्य आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई और अब सियासत गरमा गई है।
Kerala Election: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सबरीमाला मंदिर के चर्चित स्वर्ण चोरी (Sabarimala Gold Missing Case) विवाद में एक नया राजनीतिक मोड़ आ गया है। केरल हाईकोर्ट की कड़ी निगरानी और पूर्व के सख्त आदेशों के बावजूद, मामले के मुख्य आरोपियों को वैधानिक (Statutory) जमानत मिल गई है। चुनाव के माहौल में विपक्षी दल इसे राज्य सरकार और विशेष जांच दल (SIT) की बड़ी नाकामी बता रहे हैं। सबरीमाला के श्रीकोविल (गर्भगृह) और द्वारपालक मूर्तियों से जुड़े सोने के गबन मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष व सीपीएम नेता ए. पद्मकुमार को कोल्लम की विजिलेंस कोर्ट ने जमानत दे दी है।
ध्यान रहे कि इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि इससे जांच पूरी तरह चरमरा जाएगी। हाईकोर्ट ने SIT को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, SIT मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिनों के अंदर अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करने में विफल रही। कानूनी प्रावधानों के तहत, 90 दिन में चार्जशीट पेश न होने पर आरोपी स्वतः 'वैधानिक जमानत' का हकदार हो जाता है, जिसका लाभ उठा कर मुख्य आरोपी जेल से बाहर आ गए हैं।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए सबरीमाला के तंत्री (प्रधान पुजारी) कंदरारु राजीवारु को भी कोर्ट से जमानत मिल गई है। विजिलेंस कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा कि उनके खिलाफ "सुबूत का एक कतरा भी मौजूद नहीं है।" जेल से रिहा होने के बाद तंत्री राजीवारु ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उनकी गिरफ्तारी 2018 के सबरीमाला महिला प्रवेश विवाद में उनके कड़े रुख का नतीजा है। उनका कहना है कि उस वक्त मंदिर की स्थापित परंपराओं की रक्षा करने और राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध करने के कारण उन्हें अब साजिश के तहत निशाना बनाया गया है।
आगामी विधानसभा चुनावों के बीच इस घटनाक्रम ने विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है । विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने SIT की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि बिना किसी ठोस सुबूत के सबरीमाला के तंत्री को 41 दिनों तक जेल में क्यों रखा गया।
भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
भले ही SIT की देरी से मुख्य आरोपी बाहर आ गए हों, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी जांच शुरू कर दी है। SIT ने भी हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह 31 मार्च से पहले अपनी चार्जशीट दाखिल कर देगी। फिलहाल, चुनाव से ठीक पहले पुलिस की इस ढिलाई ने सत्ताधारी वामपंथी सरकार के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है।