
CEC Resignation Sachin Pilot Statement: पंजाब कांग्रेस इंचार्ज सचिन पायलट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को समय पर चेतावनी देनी चाहिए थी कि सरकार ने जो किया वह गैरकानूनी था, कर्फ्यू लगाना, नाकाबंदी करना और लोगों को गिरफ्तार करना पूरी तरह से गलत था। डेमोक्रेसी में ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। मैं अपने देश के लिए बोल रहा हूं…इस देश के लोग चाहते हैं कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) इस्तीफा दें।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि देश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात हैं। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा।
खरगे ने रविवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह और राहुल गांधी सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मिलना चाहते हैं। दोनों नेताओं ने CJI को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। उन्होंने शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने की इच्छा जताई है।
खरगे ने कहा कि वे न्यायपालिका को देश में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति से अवगत कराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे CJI से कोई मांग नहीं करेंगे। वे केवल अपनी बात रखेंगे और हालात पर चिंता जताएंगे।
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। इसके सदस्यों को अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। लेकिन उनके मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसा नहीं होने दे रहे हैं।
खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने भी कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर कर रही है। इसका मकसद कथित तौर पर 'वोट चोरी' को आसान बनाना है।
उन्होंने 2023 के उस कानून पर भी सवाल उठाए, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा की शर्तों से जुड़ा है। खरगे का आरोप है कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को जरूरत से ज्यादा कानूनी सुरक्षा दी गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।
खरगे ने दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शनों के दौरान हुई भारी पुलिस तैनाती पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब 32 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती सरकार के डर को दिखाती है।
बता दें 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक हजार लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें अरविंद केजरीवाल, पिनाराई विजयन और ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेता भी शामिल थे।