नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। मुख्यमंत्री के बाद उपमुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को शपथ दिलाई गई।
Deputy CM Salary: नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते हुए दो रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वह अब बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने 10वीं बार शपथ भी ली है। वहीं, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने डिप्टी सीएम की शपथ ली है। बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन और सम्राट चौधरी-विजय सिन्हा के डिप्टी सीएम बनने के बाद सबसे ज्यादा पूछा जा रहा सवाल यही है कि आखिर डिप्टी सीएम को कितनी सैलरी मिलती है? क्या वे कैबिनेट मंत्री से ज्यादा कमाते हैं?
भारतीय संविधान में डिप्टी सीएम का कोई उल्लेख नहीं है। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक और राजनीतिक पद है। इसलिए डिप्टी सीएम को भी ठीक उतना ही वेतन-भत्ता मिलता है, जितना किसी साधारण कैबिनेट मंत्री को।
बिहार कैबिनेट ने अप्रैल 2025 में बड़ा बदलाव किया गया था, जिसमें मंत्रियों के वेतन-भत्तों में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई। इसके बाद नई दरें इस प्रकार हैं:
मूल वेतन : 65,000 रुपए प्रति माह
क्षेत्रीय भत्ता : 70,000 रुपए प्रति माह
दैनिक भत्ता : 3,500 रुपए प्रतिदिन
आतिथ्य भत्ता : 20,000 रुपए प्रति माह
गेस्ट अलाउंस (राज्य मंत्री स्तर के लिए) : 29,500 रुपए प्रति माह
सभी भत्तों को जोड़कर एक मंत्री/डिप्टी सीएम की मासिक आय करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है (दैनिक भत्ते को पूरे महीने गिना जाए तो यह राशि और बढ़ जाता है)।
बढ़ोतरी से पहले (अप्रैल 2025 से पहले):
मूल वेतन : 50,000 रुपए
क्षेत्रीय भत्ता : 55,000 रुपए
दैनिक भत्ता : 3,000 रुपए
सैलरी के अलावा डिप्टी सीएम और कैबिनेट मंत्री को मिलने वाली सुविधाएं भी पूरी तरह एक जैसी हैं:
— सरकारी आवास
— सरकारी वाहन और ड्राइवर
— सुरक्षा (PSF/Z+ जैसी जो कैबिनेट रैंक के हिसाब से तय होती है)
— निजी सचिव, OSD और अन्य स्टाफ
— मेडिकल, टेलीफोन, बिजली- पानी मुफ्त या सब्सिडी दर पर
ये सभी सुविधाएं बिहार मंत्री (वेतन एवं भत्ते) अधिनियम 2006 के तहत दी जाती हैं।
चाहे सम्राट चौधरी हों या विजय सिन्हा, डिप्टी सीएम बनने से उनकी तनख्वाह में एक रुपया का भी इजाफा नहीं हुआ। राजनीतिक तौर पर पद भले ही नंबर-2 का हो, लेकिन पे-स्लिप पर वे आम कैबिनेट मंत्री की ही श्रेणी में आते हैं।