
उद्धव ठाकरे की शिवसेना में बगावत के बाद महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज है। उद्धव को छोड़कर एकनाथ सिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले सभी छह सांसदों ने संजय राउत पर गंभीर आरोप लगाए थे।
इस पर जब उनसे पूछा गया कि पार्टी के तमाम नेता आप पर क्यों गलत आरोप लगते हैं, तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि मैं पार्टी के प्रति वफादार हूं।
वहीं, संजय राउत ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ सिंदे के साथ अपनी दोस्ती को भी याद किया। साथ ही उन पर गंभीर आरोप भी लागए।
उन्होंने कहा- शिंदे कभी मेरे अच्छे दोस्त थे और उन्होंने मुझसे भी संपर्क करने की कोशिश की थी ताकि मैं पार्टी छोड़ हूं, क्योंकि मैं पार्टी के प्रति वफादार हूं।
संजय ने आगे कहा- मैंने शिंदे को पार्टी तोड़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वे ईडी और सीबीआई के डर से पार्टी छोड़कर चले गए। मैं पार्टी के प्रति वफादार बना हुआ हूं। आज भी मैं बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे की विचारधारा के प्रति समर्पित हूं।
महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा है। कुछ ही पहलेपहले उद्धव ठाकरे के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। एकनाथ शिंदे ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' का सफलता बताया।
17 जून के आसपास पाला बदलने वाले सभी 6 सांसद उद्धव ठाकरे की संसदीय दल की बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग ग्रुप बनाने की मांग की।
इसके बाद 22 जून को मुंबई में एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में 6 सांसदों ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा की।
जिन सांसदों ने पाला बदला है, उनमें संजय हरिभाऊ जाधव, संजय दीना पाटिल, ओम राजे निंबालकर, संजय उत्तमराव देशमुख, नागेश बापूराव पाटिल आष्टीकर और भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे शामिल हैं।
बागी सांसदों ने आरोप लगाया कि वह पार्टी में संजय राउत और आदित्य ठाकरे की भूमिका को लेकर खुश नहीं थे। सांसदों के पाला बदलने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने खुलकर कहा कि अब असली शिवसेना एकनाथ शिंदे के पास ही है।