
Kashmiri Hindu nurse Sarla Bhat case: जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख और जेल में बद यासीन मलिक के खिलाफ दाखिल नई चार्जशीट ने 1990 में मारी गई कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के परिवार में न्याय की उम्मीद जगा दी है। इस संबंध में सरला भट्ट के चचेरे भाई पीके भट्ट ने मांग की है कि किसी भी तरह से यासीन मलिक को रियायत नहीं मिलनी चाहिए। उसने जो जघन्य अपराध किया है, उसके लिए उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत में पीके भट्ट ने उन दिनों को याद किया, जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2006 में दिल्ली में शांति वार्ता के लिए यासिन मलिक की मेजबानी की थी। यासीन मलिक को राजनीतिक कैदी बताने वालों से वे पूरी तरह असहमत हैं। उन्होंने कहा, 'यासीन मलिक कोई राजनीतिक कैदी नहीं है, वह एक हत्यारा है। उसे उसी नाम से पुकारा जाना चाहिए।'
सरला भट्ट के चचेरे भाई पीके भट्ट ने बताया कि उसकी हत्या के बावजूद परिवार को लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि जब उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब करीब 200 युवक श्मशान घाट में घुस आए। उनकी राख को उन्होंने पैरों तले रौंदा। ताना मारते हुए कहा- 'तुम अभी भी यहीं हो?' उन्होंने उस पल को याद करते हुए बताया, 'हमें मुट्ठी भर राख इकट्ठा करने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा। किसी तरह हमने मुट्ठी भर राख इकट्ठा कर ली। उसी रात उन्होंने उसके घर पर भी बमबारी कर दी। उसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा। हमारे पर कश्मीर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 36 साल पुराने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के अपहरण-हत्या केस में अहम कदम उठाया है। एसआईए ने सोमवार को 700 से अधिक पन्नों का एक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें जेकेएलएफ के प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इस पर पीके भट्ट ने कहा, 'देर से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर होता है। लेकिन अब उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही है कि शायद न्याय मिलेगा।' उन्होंने भावुक होकर कहा, 'उनके माता-पिता बेचारों को कभी न्याय नहीं मिला। शायद अब उनकी आत्मा को शांति मिले। हमने तो पूरी तरह उम्मीद छोड़ दी थी।'
सरला भट्ट कश्मीर पंडित परिवार से ताल्लुक रखती थी। वह अनंतनाग की रहने वाली थी और श्रीनगर शहर के सौरा इलाके में शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान में नर्स थीं।
सरला भट्ट कश्मीर के पंडित परिवार से ताल्लुक रखती थीं। वह अनंतनाग जिले की रहने वाली थीं और श्रीनगर शहर के सौरा इलाके में शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। जानकारी के मुताबिक, कश्मीर घाटी में जब पंडितों पर हमले हो रहे थे और उन्हें भगाया जा रहा था, तब सरला भट्ट अपने काम पर जुटी थीं। उनका अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें यातनाएं दी गईं। मालबाग की ओमर कॉलोनी में स्वचालित राइफल से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच से पता चला कि हत्या से पहले दरिंदगी की गई थी।