
प्रतीकात्मक तस्वीर - पत्रिका
Kargil War: कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक लड़ा गया था। 85 दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने पहाड़ी चोटियों से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने में सफलता हासिल की। हालांकि, इस युद्ध के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जब दोनों देशों के दो युवा सैन्य अधिकारियों ने बातचीत की, एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट साझा कीं और फिर अपनी-अपनी चौकियों पर लौट गए।
यह कहानी भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी 'कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा' की है, जिसका उल्लेख उनके दोनों बेटों ने 'शूरवीर' नामक पुस्तक में किया है। इस पुस्तक का प्रकाशन पिछले वर्ष 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' ने किया था। युद्ध की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को तीन गैलेंट्री मेडल और राष्ट्रपति से पहले दो पदक प्राप्त करने वाले 60 वर्षीय कर्नल शर्मा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में जून 1999 की उस घटना को याद किया।
कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले उनकी बटालियन 22 ग्रेनेडियर्स को हैदराबाद से कारगिल भेजा गया था। वह एक जेसीओ और नौ सैनिकों की छोटी-सी टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी टीम 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी। तभी पास की एक पहाड़ी पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ने से पहले उन्होंने रणनीतिक रूप से बेस पर एक अन्य टुकड़ी तैनात की थी। हथियार इस तरह लगाए गए थे कि उनका निशाना सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर था।
उस समय पाकिस्तानी सैनिक अभी अपने बंकर तैयार कर रहे थे और लगभग खुले में थे। भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई उनके लिए बेहद विनाशकारी साबित हुई, क्योंकि उन्हें अंदाजा नहीं था कि भारतीय पक्ष ने इतनी भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद तैनात कर रखा है। भारतीय सैनिक पूरी तरह सतर्क थे। दूरबीन से देखने पर पाकिस्तानी पक्ष में अफरा-तफरी साफ दिखाई दे रही थी। करीब दो-तीन मिनट की गोलीबारी के बाद कर्नल शर्मा ने देखा कि एक बंकर के पीछे से किसी ने सफेद झंडा लहराया। यह संकेत था कि दूसरा पक्ष गोलीबारी रोककर बातचीत करना चाहता है। पुस्तक के अनुसार, नायब सूबेदार अभय ने कर्नल शर्मा को सलाह दी कि वे किसी भी कीमत पर पाकिस्तानियों पर भरोसा न करें।
नायब सूबेदार अभय की सलाह के बाद राजिंदर कुमार शर्मा ने स्थिति का आकलन किया। तभी उन्होंने देखा कि तीन-चार पाकिस्तानी सैनिक सफेद झंडे लेकर अपने बंकर से नीचे उतर रहे हैं। वे चिल्लाकर भारतीय सैनिकों से आगे न बढ़ने की गुहार लगा रहे थे।
भारतीय पक्ष पूरी तरह सतर्क था, लेकिन उनके सामने एक अप्रत्याशित स्थिति थी। उनके पास सफेद झंडा नहीं था। ऐसे में लांस नायक तुला राम आगे आए। उन्होंने अपनी सफेद बनियान उतारकर उसे अपनी 'INSAS' राइफल की नली पर बांध दिया और कर्नल शर्मा के साथ आगे बढ़ने की पेशकश की।
इसी दौरान रेडियो ऑपरेटर ग्रेनेडियर हरिनंदन ने कर्नल शर्मा को सलाह दी कि वे रेडियो पर 'टाइगर' और 'लैम्ब' से संपर्क करें तथा आगे न बढ़ें। हालांकि, राजिंदर कुमार शर्मा ने उन्हें रेडियो बंद करने का निर्देश दिया।
उधर, पाकिस्तानी सैनिक भी असमंजस में थे कि आगे क्या हो रहा है। वे लगातार चिल्ला रहे थे, 'केवल दो, केवल दो।' राजिंदर कुमार शर्मा ने देखा कि उनके दो सैनिक अपनी-अपनी जगह पर तैनता हो गए, जबकि दो आगे बढ़ गए। इस पर भारत की तरफ से राजिंदर कुमार शर्मा और तुला राम लगभग 50 मीटर आगे बढ़ गए। इसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने आग्रह किया कि केवल एक अधिकारी ही आगे आए।
इस पर राजिंदर कुमार शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर पहाड़ी पर चढ़े और वहां उनकी मुलाकात लंबे कद के पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से हुई। राजिंदर कुमार शर्मा ने अपना परिचय कैप्टन आर.के. के रूप में दिया। बाचतीत में उन्होंने बताया कि मेजर जावेद बेहद सलीके से तैयार था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह सीधे सैलून से आया हो।
मेजर जावेद ने बताया कि उनकी तरफ काफी नुकसान हुआ है। उसने पूछा कि भारतीय सेना ने गोलीबारी क्यों शुरू की। इस पर कर्नल शर्मा ने जवाब दिया, 'पहले गोलीबारी आपकी तरफ से शुरू हुई थी। हमने तो केवल जवाबी कार्रवाई की।'
कुछ देर बातचीत के बाद मेजर जावेद ने राजिंदर कुमार शर्मा को सिगरेट दी। दोनों ने साथ बैठकर सिगरेट पी। इस दौरान राजिंदर कुमार शर्मा ने उनसे पूछा कि वे उस स्थान पर क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा, 'आपको यहां से दो किलोमीटर आगे जाना चाहिए।'
मेजर जावेद ने आश्वासन दिया कि वह भारतीय पक्ष का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचा देंगे। साथ ही उन्होंने भारतीय सेना से गोलीबारी न करने का अनुरोध किया। इस पर कर्नल शर्मा ने कहा कि उनकी टीम प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही है। यदि उन पर गोली चलाई गई तो भारतीय सेना जवाबी कार्रवाई करेगी।
राजिंदर कुमार शर्मा के अनुसार, यह सुनकर पाकिस्तानी अधिकारी मुस्कुरा दिए और उनकी बात से सहमत हो गए। इसके बाद उन्होंने अपनी राजिंदर कुमार शर्मा को दे दी। राजिंदर कुमार शर्मा मुस्कुराते हुए लाइटर मांगा और मेजर जावेद ने उन्हें अपना लाइटर दे दिया। बदले में कर्नल शर्मा ने उन्हें कैडबरी की एक चॉकलेट बार दी, जो उन्हें इससे पहले कैप्टन बी.एम. करियप्पा ने प्वाइंट 5203 पर आपातकालीन राशन के रूप में दी थी। इसके बाद दोनों अधिकारी अपने-अपने सैनिकों के पास लौट गए।
Published on:
30 Jun 2026 12:49 pm
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