
Saurabh Bharadwaj: मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। भारद्वाज ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत हटाए गए मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने की भी मांग की है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और फर्जी नाम जोड़े जाने का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया था।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद से इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग मतदान के दिन वोट डालने पहुंचते हैं लेकिन तब पता चलता है कि सालों से मतदान करने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
सौरभ भारद्वाज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि उनके साथी चुनाव आयुक्तों ने उन्हें कई बार पत्र लिखे थे। भारद्वाज ने दावा किया कि इन पत्रों में उन फैसलों को लेकर आपत्ति जताई गई थी, जिन्हें चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर गैरकानूनी बताया था। उन्होंने कहा कि इन पत्रों में एसआईआर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और सुझाव निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि एसआईआर समेत उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
भारद्वाज ने कहा कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले फैसले नहीं ले सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार आयोग को मनमाने तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की मांग की है।
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों में मतदाता नाम जोड़ने, हटाने और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी मामलों पर सवाल उठाए गए थे।