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अक्षरधाम हमला: 2 आतंकियों ने मचाया था मौत का तांडव और 33 लोगों को गवानी पड़ी जान, फिर NSG के ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’ ने ऐसे किया खात्मा

Akshardham Attack: 24 सितंबर 2002 को गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले के आज 24 साल पूरे हो गए हैं। जानिए कैसे एनएसजी के 'ऑपरेशन वज्र शक्ति' ने मंदिर में घुसे दोनों आतंकियों को ढेर कर इस खौफनाक हमले का अंत किया था।
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भारत

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Rahul Yadav

Sep 24, 2026

Akshardham Attack 2002, Operation Vajra Shakti

24 सितंबर 2002 को हुए आतंकी हमले के बाद चलाया गया था ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’। (प्रतीकात्मक फोटो - एआई जनरेटेड)

Akshardham Temple Attack 2002: 24 साल पहले यानी आज ही के दिन 24 सितंबर 2002 की शाम गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर परिसर में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अचानक दो हथियारबंद आतंकी मंदिर परिसर में घुसते हैं और आतंक का ऐसा तांडव मचाते हैं कि 33 लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा, जबकि 85 से ज्यादा लोग घायल हुए। कुछ ही देर में पूरा परिसर चीख-पुकार और गोलियों की आवाज से गूंज उठता है। हर तरफ डर का माहौल था और मंदिर के अंदर बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए थे। लेकिन इसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला। आतंकियों को खत्म करने के लिए एनएसजी के कमांडो गांधीनगर पहुंचे और शुरू हुआ वह अभियान, जिसे ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’ नाम दिया गया। आखिर उस रात मंदिर के अंदर क्या हुआ? एनएसजी ने कैसे आतंकियों को घेरा? और कैसे 25 सितंबर की सुबह इस खौफनाक हमले का अंत हुआ? चलिए डिटेल में सब कुछ जानते हैं।

शाम करीब साढ़े 4 बजे मंदिर में घुसे थे आतंकी

24 सितंबर 2002 को अक्षरधाम मंदिर में रोज की तरह श्रद्धालु और दूसरे लोग मौजूद थे। शाम करीब साढ़े 4 बजे दो हथियारबंद आतंकी मंदिर परिसर के गेट नंबर 3 से अंदर दाखिल हुए। उनके पास एके-56 राइफल और ग्रेनेड थे। परिसर में घुसते ही गोलीबारी शुरू कर दी। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, आतंकियों ने सबसे पहले बच्चों के खेल और झूले वाले हिस्से में गोलीबारी की। इसके बाद वे गेट नंबर 2 की तरफ बढ़े। यहां श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और दूसरे लोगों पर गोलियां चलाईं। इसके बाद वे मुख्य मंदिर की तरफ बढ़े। मुख्य दरवाजा बंद होने के कारण वे प्रदर्शनी भवन की तरफ चले गए और वहां मौजूद लोगों को भी निशाना बनाया।

मंदिर परिसर में मच गई अफरा-तफरी

अचानक हुई गोलीबारी और ग्रेनेड के हमले से मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग अंदर फंस गए थे। आतंकी लगातार अपनी जगह बदल रहे थे। इससे उन्हें घेरना और भी मुश्किल हो रहा था। हमले की जानकारी मिलते ही गुजरात पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और राज्य रिजर्व पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारी भी वहां पहुंचे। सुरक्षा बलों ने आतंकियों का मुकाबला शुरू किया। पुलिस और कमांडो ने मंदिर की छत तक पहुंचकर मोर्चा संभाला। इसी दौरान आतंकियों की तरफ से फिर गोलीबारी हुई और एक तेज मुठभेड़ शुरू हो गई।

दिल्ली से गांधीनगर पहुंची एनएसजी की टीम

हालात गंभीर होने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की टीम को दिल्ली से गांधीनगर भेजा गया। एनएसजी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उसकी टास्क फोर्स को 24 सितंबर को ही हवाई रास्ते से गांधीनगर भेजा गया था। एनएसजी कमांडो ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय पुलिस से स्थिति की कमान अपने हाथ में ली। इसके बाद मंदिर परिसर को फिर से घेरा गया, ताकि कोई आतंकी बाहर न निकल सके। कमांडो को अलग-अलग छोटी टीमों में बांटा गया। उनका मकसद एक साथ कई दिशाओं से मंदिर परिसर में प्रवेश कर आतंकियों को ढूंढना था।

आधी रात के बाद आतंकियों से हुआ पहला संपर्क

एनएसजी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, आधी रात के आसपास कमांडो का आतंकियों से पहला सीधा संपर्क हुआ। मंदिर परिसर काफी बड़ा था। आसपास खुले इलाके और झाड़ियां भी थीं। इसका फायदा उठाकर आतंकी बार-बार अपनी जगह बदल रहे थे। कमांडो लगातार उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान गोलीबारी भी होती रही। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, एनएसजी के मौके पर नियंत्रण लेने के बाद करीब पांच घंटे तक गोलीबारी चली। यह कार्रवाई 25 सितंबर की सुबह तक जारी रही।

ऑपरेशन वज्र शक्ति में एक-एक कर मारे गए दोनों आतंकी

25 सितंबर की सुबह एनएसजी कमांडो आतंकियों के करीब पहुंच गए। एनएसजी के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, सूबेदार सुरेश चंद यादव ने एक आतंकी को नजदीक जाकर रोकने की कोशिश की। उन्होंने नजदीकी मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया। इसी दौरान उन्हें भी गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। इसके बाद एनएसजी की दूसरी टीम ने दूसरे आतंकी को भी मार गिराया। दोनों आतंकियों के मारे जाने के बाद अभियान खत्म किया गया। मंदिर परिसर से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया। अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

एनएसजी कमांडो सुरेश चंद यादव ऑपरेशन में हुए शहीद

ऑपरेशन वज्र शक्ति में एनएसजी कमांडो सुरेश चंद यादव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। एनएसजी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 51 विशेष कार्रवाई समूह का हिस्सा थे। उन्होंने आतंकियों को रोकने के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़कर कार्रवाई की। एक साथी कमांडो को गोली लगने के बाद उन्होंने उसे सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उन्होंने अपने दल के कमांडर को भी कवर दिया। आतंकियों के बेहद करीब पहुंचकर उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया। इसी दौरान उन्हें गोलियां लगीं और 25 सितंबर 2002 को वे शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

एक अन्य एनएसजी कमांडो सुरजन सिंह भी इस अभियान में गंभीर रूप से घायल हुए थे। एनएसजी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने आतंकियों की तरफ बढ़ते हुए अपनी टीम को कवर दिया। इसी दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी। घायल होने के बावजूद उन्होंने कार्रवाई जारी रखी। बाद में उनकी चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। एनएसजी के रिकॉर्ड में उनकी शहादत की तारीख 24 सितंबर 2002 दर्ज है।

हमले में 33 लोगों की हुई थी मौत

अक्षरधाम हमले में मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। एनएसजी के अपने विवरण में 30 नागरिकों के मारे जाने का उल्लेख है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले में हमले में कुल 33 लोगों की मौत और 85 से ज्यादा लोगों के घायल होने का उल्लेख किया गया है। इसी न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, घायलों में पुलिस अधिकारी और जवान भी शामिल थे।

घायलों को गांधीनगर और अहमदाबाद के अस्पतालों में ले जाया गया। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में बताया गया है कि घायलों और मृतकों को सोला सिविल अस्पताल तथा अहमदाबाद के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया था।

हमले के बाद शुरू हुई लंबी जांच

ऑपरेशन खत्म होने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया और गिरफ्तारियां हुईं। मामले में विशेष अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने भी इन सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 16 मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने निचली अदालत और गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए अपील करने वाले छह आरोपियों को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन की तरफ से पेश सबूतों और जांच में कई गंभीर कमियां बताईं।

24 साल बाद भी याद है वो रात

आज 24 सितंबर 2026 को अक्षरधाम हमले को 24 साल पूरे हो गए हैं। 24 सितंबर 2002 की वह शाम गुजरात के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में दर्ज हो गई। हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की कार्रवाई ने आतंकियों का खात्मा किया। इसी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’ के नाम से जाना जाता है। एनएसजी आज भी इसे अपने प्रमुख अभियानों में शामिल करता है।