केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया है कि संसद सत्र के बाद हुई बातचीत में शशि थरूर ने इशारों में स्वीकार किया था कि कांग्रेस पार्टी को एंटी-वूमन माना जा सकता है।
संसद सत्र के बाद नेताओं के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर बड़ा दावा किया है। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। रिजिजू ने कहा कि संसद सत्र के बाद हुई बातचीत में थरूर ने इशारों में स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी को एंटी-वूमन माना जा सकता है, हालांकि उन्होंने खुद को इस श्रेणी से अलग बताया था।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि फोटो सेशन के दौरान शशि थरूर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कांग्रेस भले ही एंटी-वूमन हो सकती है, लेकिन कोई उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं मान सकता। रिजिजू ने आगे कहा कि उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि थरूर की छवि महिला विरोधी नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी पर सवाल उठते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में 18 अप्रैल को शशि थरूर द्वारा साझा की गई एक तस्वीर भी है। इस तस्वीर में उन्होंने किरेन रिजिजू के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि जब रिजिजू ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें ऐसा नहीं कह सकता। इस पोस्ट में थरूर ने हल्के-फुल्के अंदाज में रिजिजू को चार्मिंग भी बताया था। थरूर ने अपने बयान में महिलाओं की प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण को किसी संभावित खतरनाक परिसीमन प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
इस विवाद के बीच लोकसभा में पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) बिल भी चर्चा में है, जो महिला आरक्षण कानून में बदलाव से जुड़ा था। यह बिल सदन में पारित नहीं हो सका क्योंकि इसे आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। केवल 298 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि बिल विशेष बहुमत हासिल नहीं कर पाया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, को महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर जवाब देना होगा।