
US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की शानदार जीत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घरेलू राजनीति को बड़ा झटका दिया है। संसद के दोनों सदनों में सत्ता का समीकरण बदलने के साथ कई राज्यों में भी विपक्ष ने अपनी ताकत दिखाई है। हालांकि, कांग्रेस सांसद शशि थरूर का मानना है कि इस राजनीतिक बदलाव से भारत-अमेरिका संबंधों पर तत्काल कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद करना गलत होगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति संबंधी शक्तियों को इसकी प्रमुख वजह बताया।
तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने चुनावी नतीजों को असाधारण बताते हुए कहा कि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव आमतौर पर सत्तारूढ़ राष्ट्रपति के लिए मुश्किल साबित होते हैं। लेकिन इस बार का झटका सामान्य राजनीतिक नुकसान से कहीं अधिक बड़ा है।
उनके मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में हार का सामना करना पड़ा है। टेक्सास जैसे पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्य में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की सफलता ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
थरूर ने कहा कि अमेरिकी लोकतंत्र की मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वहां मतदाता सत्ता में बैठे लोगों को चुनौती देने और राजनीतिक दिशा बदलने का अवसर रखते हैं।
इस चुनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका में विविध समुदायों की राजनीतिक भागीदारी है। थरूर ने विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं के प्रमुख पदों तक पहुंचने को उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।
उन्होंने मिशिगन में पहली बार मुस्लिम सीनेटर चुने जाने का उल्लेख किया। साथ ही भारतीय मूल के नेताओं की सफलता पर भी खुशी जताई।
थरूर के मुताबिक, लॉस एंजिलिस की मेयर बनीं नित्या रमन का तिरुवनंतपुरम से पारिवारिक संबंध होना उनके लिए विशेष गर्व का विषय है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का भी जिक्र किया।
गौरतलब है कि नित्या रमन लॉस एंजिलिस की राजनीति में भारतीय मूल की प्रमुख नेता हैं। वहीं, जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर पद पर पहुंचे हैं। इन उपलब्धियों को अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी के रूप में देखा जा रहा है।
थरूर ने साफ कहा कि अमेरिकी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार को भारत के लिए किसी बड़ी कूटनीतिक राहत के रूप में नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने समझाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति को विदेश नीति के मामलों में व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। कांग्रेस राष्ट्रपति के खर्च और बजट पर नियंत्रण रख सकती है, लेकिन हर अंतरराष्ट्रीय फैसले को रोकना उसके लिए आसान नहीं है।
विशेष रूप से टैरिफ, रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंधात्मक कदम, ईरान के साथ युद्ध और यूक्रेन संघर्ष से जुड़े अमेरिकी फैसलों पर राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।
थरूर के अनुसार, यदि राष्ट्रपति किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना चाहते हैं, तो कांग्रेस बजट को सीमित कर सकती है। लेकिन विदेश नीति के अन्य मामलों में राष्ट्रपति को काफी स्वतंत्रता हासिल है।