
Tamil Nadu Delimitation: संसद में गुरुवार को महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पेश होने से पहले बवाल मच गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) विधेयक की एक प्रति जलाकर विरोध जताया है। इस दौरान उन्होंने विरोध में काले कपड़े भी पहने थे।
इससे पहले सीएम स्टालिन ने राज्यभर में परिसीमन विरोधी आंदोलन की शुरुआत करते हुए काला झंडा भी दिखाया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह काला कानून तमिलों को अपने ही देश में शरणार्थी बना देगा और इसके खिलाफ तमिलनाडु में व्यापक विरोध होगा।
उन्होंने कहा कि जैसे पहले हिंदी विरोध आंदोलन की आग तमिलनाडु से उठकर दिल्ली तक पहुंची थी, वैसे ही यह नया आंदोलन भी केंद्र सरकार की अहंकारी नीतियों को चुनौती देगा।
बता दें कि परिसीमन को लेकर दक्षिण राज्यों में विरोध काफी लंबे समय से चल रहा है। लेकिन मोदी सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अभियान 2023 को लागू करने के लिए हाल ही में लाए गए संशोधन प्रस्तावों के बाद और तेज हो गया है।
तमिलनाडु सरकार ने चुनावी माहौल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी आपत्ति जताई है। यह विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है।
स्टालिन ने संविधान संशोधन विधेयक के विरोध में काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की संरचना और सीटों की संख्या में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखता है।
वहीं, तमिलनाडु के मंत्रीअंबिल महेश पोय्यामोझी के तिरुचिरापल्ली स्थित आवास पर भी विरोध स्वरूप काले झंडे लगाए गए।
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है, जिससे राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं, जबकि इस पर अभी तक विपक्ष को पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि संघीय ढांचे के मुद्दे पर राज्यों से चर्चा होनी चाहिए, लेकिन केंद्र इसे टकराव का विषय बना रहा है।
इसी बीच सीएम स्टालिन ने राज्य के लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों पर काले झंडे लगाकर इस फैसले का विरोध करें और इसे तमिलनाडु के अधिकारों की लड़ाई बताया।
बता दें कि केंद्र सरकार 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है। इसके लिए 2023 के कानून में संशोधन और परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग करने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 850 की जाएंगी, जिनमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं।