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अब नहीं चलेगा सुसाइड और एडल्ट कंटेंट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स हुए सख्त

Social Media Platforms पर सुसाइड, सेल्फ-हार्म और एडल्ट कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। जानें 2022 से 2025 तक इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट और एक्स पर कंटेंट हटाने की कार्रवाई और एक्टिव यूजर्स के आंकड़े।
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social media content.

आत्महत्या और अश्लील कंटेंट पर सोशल मीडिया कंपनियों का बड़ा एक्शन (Photo- AI)

Social Media Companies on Content: सोशल मीडिया कंपनियां अब आत्महत्या और एडल्ट कंटेंट पर पहले से ज्यादा सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं। कंपनियां अब ऐसी संवेदनशील पोस्ट को तुरंत हटा रही हैं। इनकी कुल कार्रवाई में आत्महत्या और सेल्फ हार्म कैटेगरी की हिस्सेदारी साल 2022 में सिर्फ 5.41% थी, जो साल 2025 में बढ़कर 21.44% हो गई। इसी तरह अश्लीलता के खिलाफ की गई कार्रवाई भी 10.97% से बढ़कर 16.85% पर पहुंच गई।

कंटेंट उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई (कुल कार्रवाई – करोड़ में)

प्लेटफॉर्म2022202320242025
इंस्टाग्राम15.01%17.54%29.71%55.90%
फेसबुक84.74%82.38%70.04%43.38%
स्नैपचैट0.25%0.07%0.24%0.72%
एक्स (X)0.002%0.01%0.02%0.004%
कुल कार्रवाई (करोड़ में)30.1235.6323.77160.697

किस कैटेगरी में कितनी हुई कार्रवाई?

कैटेगरी2022202320242025
आत्महत्या और सेल्फ-हार्म5.41%9.34%17.00%21.44%
एडल्ट कंटेंट और न्यूडिटी10.97%10.24%15.92%16.85%
आतंकवाद और हिंसा14.74%9.10%5.84%8.82%
बच्चों की सुरक्षा6.89%3.42%4.69%5.69%
बुलिंग और हैरासमेंट2.32%3.51%6.07%1.85%
हेट स्पीच0.53%1.15%0.68%0.59%

भारत की कुल आबादी में एक्टिव यूजर्स की हिस्सेदारी (% में)

प्लेटफॉर्म2022202320242025
इंस्टाग्राम16.16%15.97%25.01%28.28%
फेसबुक23.18%21.88%25.29%26.23%
स्नैपचैट8.84%12.00%13.85%14.21%
एक्स (X)1.66%1.89%1.80%1.65%

बुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले घटे

आंकड़े बताते हैं कि बुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की हिस्सेदारी 2022 के 2.32% से घटकर 2025 में 1.85% रह गई। इसी तरह हेट स्पीच से जुड़े मामलों का हिस्सा भी 1% से घटकर 0.59% हो गया।

AI आधारित मॉडरेशन सिस्टम से कंटेट की पहचान में तेजी

सोशल मीडिया कंपनियों ने 2022 से 2025 के बीच कंटेंट मॉडरेशन को काफी सख्त किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडरेशन सिस्टम, यूजर सेफ्टी पर बढ़ता जोर और विभिन्न देशों के नियम हैं। अब आत्महत्या, सेल्फ-हार्म, अश्लीलता, बच्चों की सुरक्षा, हेट स्पीच और हिंसा से जुड़े कंटेंट की पहचान पहले से कहीं तेजी से की जा रही है।

कई मामलों में संदिग्ध पोस्ट यूजर की शिकायत से पहले ही हटा दी जाती हैं। भारत जैसे बड़े सोशल मीडिया बाजार में बढ़ते यूजर बेस के साथ कंपनियां अपने कम्युनिटी गाइडलाइंस को सख्ती से लागू कर रही हैं, ताकि प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।