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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्यों पीछे हटे थे सोनम वांगचुक? बताया क्यों लास्ट टाइम में बदला अपना रुख

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्होंने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों नरम कर दी थी। वो नहीं चाहते थे कि स्टूडेंट के साथ…नीचे पढ़ें पूरी अपडेट।
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Sep 01, 2026
sonam wangchuk
फोटो में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (सोर्स: आईएएनएस और ANI)

Sonam Wangchuk Statement: सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर वह अंतिम समय में अपना रुख क्यों बदला? उन्होंने सरकार से बातचीत के दौरान अपनी इस मांग को क्यों नरम किया? उन्होंने साफ किया कि उस समय उनके लिए सबसे बड़ी चिंता इस्तीफा नहीं थी। बल्कि उनकी प्राथमिकता कुछ और थी।

इस्तीफे की मांग क्यों हुई नरम?

सोनम वांगचुक ने ‘PGX पॉडकास्ट’ में प्रखर गुप्ता से बातचीत में इस पूरे मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी पहली प्राथमिकता नहीं रह गया था। क्योंकि उन्हें यह भी महसूस होने लगा था कि इस्तीफे की मांग आगे भी उठाई जा सकती है। दूसरे लोग भी यह मांग कर रहे थे। इसलिए उन्होंने अपना ध्यान दूसरी जरूरी बातों पर केंद्रित किया।

उनका कहना था कि प्रधान के इस्तीफे के जरिए जवाबदेही की मांग बाद में भी उठ सकती है। लेकिन अगर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर केस दर्ज हो गए, तो उन्हें लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

छात्रों की कानूनी सुरक्षा बनी सबसे बड़ी मांग

वांगचुक ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत में उनकी सबसे अहम शर्त थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ FIR या किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी शर्त बताया, जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता था।

सरकारी प्रतिनिधियों ने शुरुआत में मौखिक आश्वासन देने की बात कही थी। लेकिन वांगचुक इससे सहमत नहीं हुए। उन्होंने लिखित आश्वासन की मांग की। उनका कहना था कि सिर्फ बोलकर दिया गया भरोसा बाद में काम नहीं आता। आखिरकार 23 जुलाई की रात करीब 11:30 बजे उन्हें बताया गया कि सरकार लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है।

हिंसा फैलने का भी था डर

वांगचुक के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह हिंसा का डर भी था। उन्होंने सितंबर 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा के अपने अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लंबे समय बाद भी कई मामले लंबित थे। कुछ ऐसे लोग भी जेल पहुंचे, जिन्होंने हिंसा रोकने की कोशिश की थी। वांगचुक को डर था कि दिल्ली में जारी प्रदर्शन के हालात भी बिगड़ सकते हैं। उन्होंने 23 जुलाई की रात कनॉट प्लेस में हिंसक भीड़ की खबरों का जिक्र किया। उन्हें आशंका थी कि अगर आंदोलन मुंबई, लखनऊ और दूसरे शहरों तक फैल गया, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई। वांगचुक ने कहा कि वह जवाबदेही के तौर पर इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हैं। लेकिन उनके मुताबिक, सिर्फ मंत्री बदलने से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव जरूरी नहीं है।

Updated on:
01 Sept 2026 11:59 am
Published on:
01 Sept 2026 11:59 am