
India longest hunger strikes: नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने के कारण उनका वजन करीब 9 किलोग्राम कम हो गया है। इससे उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर शुक्रवार को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। सोनम वांगचुक के अनशन के बीच देश में लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाले अन्य प्रमुख व्यक्तित्वों की भी चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं ऐसे कुछ लोगों के बारे में, जिन्होंने अपने उद्देश्यों के लिए लंबे समय तक उपवास या आमरण अनशन किया।
भारत में सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला के नाम है। उन्होंने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) को हटाने की मांग को लेकर लगभग 16 वर्षों तक अनशन किया। उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक था। उन्होंने अपने शांतिपूर्ण विरोध से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया।
'गंगा पुत्र' के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और संत स्वामी निगमानंद सरस्वती ने उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर अवैध रेत खनन और पत्थर तोड़ने की गतिविधियों के विरोध में 19 फरवरी 2011 को आमरण अनशन शुरू किया था। उनका अनशन 115 दिनों तक चला। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे कोमा में चले गए। अंततः 13 जून 2011 को उनका निधन हो गया।
वर्ष 2018 में अन्ना हजारे ने किसानों की समस्याओं और लोकपाल से जुड़े मुद्दों को लेकर 23 मार्च से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया। यह अनशन लगभग 7-8 दिनों तक चला।
इससे पहले वर्ष 2011 में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन के तहत जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर उनका सबसे चर्चित अनशन 16 अगस्त से शुरू हुआ था, जो लगभग 12-13 दिनों तक चला।
शहीद भगत सिंह और उनके साथियों ने लाहौर जेल में 116 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की। लाहौर षड्यंत्र केस के दौरान भारतीय और यूरोपीय कैदियों के साथ किए जा रहे भेदभाव, खराब भोजन और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उन्होंने जून 1929 में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी जतिन दास (जतींद्र नाथ दास) ने लाहौर सेंट्रल जेल में राजनीतिक बंदियों के अधिकारों और सम्मान की मांग को लेकर 63 दिनों तक भूख हड़ताल की। उन्होंने 13 जुलाई 1929 को अनशन शुरू किया और 13 सितंबर 1929 को अनशन के दौरान ही उनका निधन हो गया।
पोट्टी श्रीरामुलु ने अलग आंध्र राज्य के गठन की मांग को लेकर 58 दिनों तक आमरण अनशन किया। 15 दिसंबर 1952 को अनशन के 58वें दिन उनका निधन हो गया। उनके बलिदान के बाद अलग आंध्र राज्य के गठन की प्रक्रिया तेज हुई और स्वतंत्र भारत के राज्यों के पुनर्गठन पर व्यापक प्रभाव पड़ा।
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधारों के दौरान कई बार उपवास किए। उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिनों का था। उन्होंने दो बार 21-दिवसीय उपवास रखा। पहला 1933 में अस्पृश्यता उन्मूलन और आत्मशुद्धि के उद्देश्य से तथा दूसरा 1943 में ब्रिटिश शासन द्वारा नजरबंदी के दौरान विरोध स्वरूप।
पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 131 दिन आमरण अनशन किया। उनका उपवास 26 नवंबर 2024 से छह अप्रैल 2025 तक चला। उनकी प्रमुख मांग फसलों के लिए एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी थी।