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ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष का भारत पर दोहरी मार, प्रवासी मजदूरों की नौकरियों पर संकट

Iran-US War: अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासी भारतीयों की नौकरी पर संकट आ गया है। कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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Iran attacking Dubai

ईरान का दुबई पर हमला (फोटो - Rashid एक्स पोस्ट)

Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष एकबार फिर तेज हो गया है। इसके चलते वैश्किव अर्थव्यवस्था भी हिचकोले खा रही है। कच्चे तेल के दाम एकबार फिर से बढ़ने लगे हैं। भारत पर इसकी दोहरी मार पड़ती हुई दिखाई दे रही है। पहला कच्चे तेल के दाम के चलते महंगाई बीते कुछ महीनों में बढ़ी है। दूसरा, खाड़ी के देशों में लाखों की संख्या में भारतीय काम करते हैं। वह भारी-भरकम रेमिटेंस भेजते हैं। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के महत्वपूर्ण स्रोत में से एक है। अब इन लोगों के नौकरियों पर संकट के बादल छा गए हैं।

दुबई में काम करने वाले हजारों भारतीयों की नौकरी पर संकट आ गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी दुबई पर भी मिसाइलें गिरी। सुरक्षा का मुद्दा गंभीर रूप से सामने आया। भारतीय प्रवासी मजदूरों ने कहा कि युद्ध के बाद दुबई में लोगों की नौकरी चली गई है। वेतन कम हो गया है। दुबई और UAE के पर्यटन, विमानन उद्योग पर असर पड़ा है। व्यवसायों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, UAE के अधिकारी इस मंदी को अस्थायी बताते हैं, लेकिन कई मजदूर अलग ही हकीकत बताते हैं।

घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं को नहीं मिला काम

युद्ध के चलते घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं को अब मुश्किल से काम मिल रहा है। फिलीपिंस की रहने वाली जॉय विवंडा जो दुबई में घरेलू कामकाज करती हैं। वह बीते कुछ दिनों से खाली बैठी हुई हैं। वह रोजाना सड़कों पर लोगों से काम मांगती हैं, लेकिन उनके हाथ सिर्फ मायूसी लगती है। जॉय विवंडा ने कहा कि फिलिपींस लौटना कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि वह दुबई की अपनी कमाई से चार बच्चों का पालन-पोषण करती हैं।

भारतीय अकाउंटेंट मुजीब रहमान ने कहा कि वह कैटरिंग कंपनी में काम करते थे। युद्ध के चलते उनका कारोबार पूरी तरह से बंद हो गया। कंपनी के पास कर्मचारियों और सप्लायरों को भुगतान करने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो नहीं है। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों ने नई भर्तियां करना बंद कर दिया है। भारतीय होटल हाउसकीपर वेंकट की नौकरी चली गई और वह अप्रैल में घर लौट आए। अब बच्चों स्कूल फीस पर संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए हुई युद्ध-विराम की घटना से हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच फिर से हुए हमलों ने अनिश्चितता का माहौल बनाए रखा है।

मैनपावरग्रुप के 546 UAE नियोक्ताओं के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि हर चार में से एक नियोक्ता 2026 की तीसरी तिमाही में नौकरियों में कटौती करने की योजना बना रहा है। लगभग एक-तिहाई नियोक्ताओं की नई भर्तियां करने की कोई योजना नहीं है।

सरकार कैसे प्रतिक्रिया दे रही है?

UAE ने मंदी के दौरान व्यवसायों की मदद के लिए $680 मिलियन से अधिक के सहायता पैकेज शुरू किए हैं। अप्रैल में एक इंटरव्यू के दौरान, अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मरी ने युद्ध के असर को अस्थाई रुकावट बताया है। दुबई इन्वेस्टमेंट्स के CEO खालिद जसीम ने भी कहा कि हालात जल्द सुधर जाएंगे।

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