राष्ट्रीय

सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाईकोर्ट गंभीर, अस्पताल ट्रांसफर याचिका पर 21 जुलाई को फिर सुनवाई

Sonam Wangchuk Health Update: दिल्ली हाई कोर्ट सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखेगा। इससे पहले हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की सेहत की ताजा जानकारी मांगी है, क्योंकि एक रिपोर्ट में क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया का लेवल बढ़ा हुआ पाया गया था।
2 min read
Sonam Wangchuk Health Update
सोनम वांगुचक और गीतांजलि जे आंग्मो, photo- patrika

Sonam Wangchuk Health Update: दिल्ली हाई कोर्ट सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखेगा। इससे पहले हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की सेहत की ताजा जानकारी मांगी है, क्योंकि एक रिपोर्ट में क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया का लेवल बढ़ा हुआ पाया गया था। कोर्ट ने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि वे उनकी पत्नी और भाई की मौजूदगी में उनके सैंपल लें। कोर्ट ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता उनकी जान बचाना है, चाहे उनकी आशंकाओं का आधार कुछ भी हो।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल को सोनम वांगचुक की पैथोलॉजिकल रिपोर्ट (जिसमें AIIMS और एक प्राइवेट लैब की एनालिसिस रिपोर्ट भी शामिल हैं) और सभी हेल्थ बुलेटिन हलफनामे के साथ जमा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने AIIMS के अधिकारियों और इलाज करने वाले डॉक्टरों को मौजूद रहने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 21 जुलाई दोपहर 12:30 बजे जारी रखेगी।

कोर्ट में हेल्थ बुलेटिन पढ़कर सुनाया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खुली अदालत में सोनम वांगचुक का ताज़ा मेडिकल बुलेटिन पढ़कर सुनाया। बुलेटिन के मुताबिक, वे होश में हैं और उनकी हीमोडायनामिक स्थिति स्थिर है। वांगचुक की पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सैचुरेशन सामान्य सीमा में हैं, लेकिन लंबे समय तक उपवास के कारण उनमें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के क्लिनिकल लक्षण दिख रहे हैं।

वकील बोले, वांगचुक अस्पताल में नहीं हैं सहज

गीतांजलि जे. आंग्मो के वकील ने कहा कि सोनम वांगचुक को विरोध करने का अधिकार है और भूख हड़ताल विरोध का एक ऐसा तरीका है जिसे संविधान में मान्यता मिली हुई है। उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है, लेकिन सोनम वांगचुक ऐसे माहौल में नहीं थे जहां उन्हें सहज महसूस हो।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, मामला इच्छा-मृत्यु का नहीं

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह मामला इच्छा-मृत्यु (यूथेनेशिया) का नहीं है। हम एक ऐसे व्यक्ति के मामले को देख रहे हैं जिसे विरोध करने का अधिकार है और वह उस अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा, मान लीजिए कोई कहता है कि जब तक मेरी मांगें पूरी नहीं होंगी तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। ऐसे में जनहित का सवाल आ जाता है। यह न केवल राज्य के हित में होगा, बल्कि यह उसकी जिम्मेदारी भी होगी कि वह यह सुनिश्चित करे कि उस व्यक्ति की सेहत और न बिगड़े। हम एक ऐसे व्यक्ति के मामले को देख रहे हैं जो विरोध-प्रदर्शन कर रहा है।

Updated on:
20 Jul 2026 07:28 pm
Published on:
20 Jul 2026 05:21 pm
Also Read
View All