
Cockroach Janta Party: देश में कॉकरोच जनता पार्टी जमकर ट्रेंड कर रहा है। अब सोशल मीडिया से आगे बढ़कर देश की राजनीति में भी इसका असर दिख रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों के तरफ से बयान आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब सोनम वांगचुक का नाम भी जुड़ गया है। अब इस अभियान को मशहूर पर्यावरणविद और शिक्षा में बेहतरीन काम कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन भी मिल गया है। वांगचुक ने इस आंदोलन को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह तरीका डराने वाला नहीं, बल्कि समझने वाला है।
Cockroach Janta Party के समर्थन में बोलते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि आज के युवा गुस्से को हिंसा में बदलने के बजाय क्रिएटिव अंदाज में सामने ला रहे हैं और यह लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में खुद को 'आनरेरी कॉकरोच' भी बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस आंदोलन के सदस्य बनेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह इसके लिए योग्य नहीं हैं क्योंकि न तो वह बेरोजगार हैं और न ही आलसी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह युवाओं की भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं।
वांगचुक ने सरकार को भी एक सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की आवाज दबाने से समस्या खत्म नहीं होती। उन्होंने आगे कहा कि, 'मैसेंजर को मत मारो, मैसेज को समझो।” उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर व्यंग्य, मीम या क्रिएटिव पोस्ट लोकतंत्र का हिस्सा हैं और इन्हें दुश्मनी की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अखबारों में कार्टूनिस्ट बड़े नेताओं के कैरिकेचर बनाते हैं और उसे अभिव्यक्ति की आजादी माना जाता है, उसी तरह सोशल मीडिया पर भी युवाओं का व्यंग्य लोकतांत्रिक फीडबैक की तरह देखा जाना चाहिए।
नेपाल का उदाहरण देते हुए वांगचुक ने चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि जब लोगों की ऑनलाइन आवाज दबाई जाती है या इंटरनेट बंद किया जाता है, तब नाराजगी सड़कों पर उतर आती है। उनके मुताबिक नेपाल में हुई हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि लंबे समय से दबाए जा रहे गुस्से का नतीजा थी। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं के अकाउंट बंद किए जाएंगे या उनकी डिजिटल अभिव्यक्ति पर रोक लगेगी, तो हालात कहीं भी बिगड़ सकते हैं।
इधर इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। बीजेपी नेता सुकांता मजूमदार ने दावा किया कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के करीब 49 प्रतिशत फॉलोअर्स पाकिस्तान से हैं, जबकि भारत से केवल 9 प्रतिशत फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं।