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सुप्रीम कोर्ट का फरमान: यौन अपराध मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता अनिवार्य, गाइडलाइन सभी अदालतों में लागू

Supreme Court Decision: यौन अपराध मामलों के विषय में सुप्रीम कोर्ट ने फरमान सुनाया है। क्या है सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 15, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

यौन अपराधों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (National Judicial Academy - NJA) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट (High Courts) और जिला अदालतों (District Courts) की वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जॉयमाल्य बागची (Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी. मोहना (Venkita Subramani Mohana) की बेंच ने साफ कर दिया है कि सभी अदालतें इन दिशा-निर्देशों का पालन करें।

सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट के आदेश का हुआ ज़िक्र

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) के हाल ही में सुनाए आदेश का ज़िक्र किया, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और छाती दबाने को बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं माना गया। पटना हाईकोर्ट के इस आदेश पर विवाद भी छिड़ा था। अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस विवादित आदेश जैसा है, जिसमें नाबालिग के पायजामे का नाड़ा खोलने, छाती पकड़ने और पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश को भी बलात्कार के प्रयास की श्रेणी से बाहर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट फरवरी में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर चुका है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नए निर्णयों का अध्ययन करना भी न्यायाधीशों का दायित्व है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि वो पटना हाईकोर्ट के फैसले पर भी विस्तृत आदेश पारित करेगी।

रिपोर्ट में क्या है?

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता, पीड़ित-केंद्रित भाषा और गरिमापूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण अपनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को इनका पालन करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने और चार्जशीट दाखिल करने में भी इन दिशा-निर्देशों को अपनाए। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट, जिला अदालतों, राष्ट्रीय और राज्य न्यायिक अकादमियों के साथ ही विधि विश्वविद्यालयों में भी उपलब्ध कराई जाएगी।