
तस्लीमा नसरीन और विधायक अखरुज्जमान। फाइल फोटो- पत्रिका
कोलकाता। कोलकाता में बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक अखरुज्जमान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तस्लीमा नसरीन ने मुस्लिम समुदाय और इस्लामी शरीयत के खिलाफ काफी बातें कही हैं। टीएमसी विधायक का कहना है कि अगर कोई मुसलमानों के खिलाफ बोलता है तो डबल इंजन सरकार उसका सम्मान करती है। इसमें कहने के लिए क्या है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है।
बता दें कि बंगलादेशी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन लगभग 20 साल बाद एक अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में एक साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आ रही हैं। साल 2007 में उनके लेखन को लेकर हुए तीव्र विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण शहर छोड़ने के बाद से राज्य में यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी। यह कार्यक्रम सेक्युलर मिशन, पश्चिमबंगेर पक्षे और मानवाधिकार संगठन एचआरबीएफएफ सहित कई संस्था संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी उपस्थित रहने की संभावना है। इस दौरान नसरीन की कविताओं का पाठ, उनकी साहित्यिक कृतियों पर आधारित गीत और साहित्य एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में उनके योगदान पर चर्चा की जायेगी। पश्चिमबंगेर पक्षे के मोहित राय ने बताया कि वाममोर्चा सरकार समर्थित कुछ कट्टरपंथियों के कारण नसरीन को कोलकाता छोड़ना पड़ा था। नसरीन के पश्चिम बंगाल आने पर हालांकि कोई कानूनी रोक नहीं थी, लेकिन पिछली सरकारें कट्टरपंथी समूहों के दबाव में झुकने के कारण उनकी वापसी का रास्ता साफ करने में नाकाम रहीं।
राय ने कहा कि राज्य में नई सरकार है और हमने अपने मुख्यमंत्री से संपर्क किया, जिन्होंने लेखिका को पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है। हमने मुख्यमंत्री को आमंत्रित भी किया और उन्होंने अपनी सहमति दे दी है। लेखिका के नागरिक अभिनंदन के दौरान वह भी उपस्थित रहेंगे। प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे। तस्लीमा की वापसी का रास्ता साफ करने में जुटी संस्था 'सेक्युलर मिशन' प्रमुख उस्मान मलिक ने कहा कि तस्लीमा धार्मिक कट्टरता के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक हैं। कुछ राजनीतिक कारणों से उन्हें पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। भाजपा सरकार के आने से नया माहौल बना है और हमें इस प्रसिद्ध लेखिका को वापस लाने का अवसर मिल रहा है।
नसरीन अपनी पुस्तक 'द्विखंडितो' के प्रकाशन पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद साल 2007 में कोलकाता से चली गई थीं। शहर के कुछ हिस्सों में हुए प्रदर्शनों ने कानून-व्यवस्था का गंभीर संकट खड़ा कर दिया था, जिसके बाद स्थिति सामान्य करने के लिए सेना तैनात करनी पड़ी थी। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी के नेतृत्व वाली वाममोर्चा सरकार ने इस विवादित किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लेखिका से राज्य छोड़ने को कहा था। किताब से बाद में हालांकि प्रतिबंध हटा लिया गया था, लेकिन नसरीन कोलकाता वापस नहीं लौटीं।
Updated on:
14 Jul 2026 09:52 pm
Published on:
14 Jul 2026 09:46 pm
