नसरीन अपनी पुस्तक 'द्विखंडितो' के प्रकाशन पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद साल 2007 में कोलकाता से चली गई थीं। शहर के कुछ हिस्सों में हुए प्रदर्शनों ने कानून-व्यवस्था का गंभीर संकट खड़ा कर दिया था, जिसके बाद स्थिति सामान्य करने के लिए सेना तैनात करनी पड़ी थी। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी के नेतृत्व वाली वाममोर्चा सरकार ने इस विवादित किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लेखिका से राज्य छोड़ने को कहा था। किताब से बाद में हालांकि प्रतिबंध हटा लिया गया था, लेकिन नसरीन कोलकाता वापस नहीं लौटीं।